लखनऊ। सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने उत्तर प्रदेश को विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) का प्रमुख केंद्र बनाने के उद्देश्य से “मिशन FDI-UP” शुरू करने का प्रस्ताव रखा है। इस संबंध में उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर राज्य को वैश्विक निवेशकों की पहली पसंद बनाने के लिए विशेष रणनीति अपनाने का सुझाव दिया है।
- उत्तर प्रदेश की उपलब्धियों को बताया मजबूत आधार
डॉ. सिंह ने अपने पत्र में कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने कानून-व्यवस्था, एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, औद्योगिक कॉरिडोर, रक्षा उत्पादन, डेटा सेंटर, इलेक्ट्रॉनिक्स, पर्यटन और निवेशक सुविधा जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के पास देश का सबसे बड़ा उपभोक्ता बाजार, विशाल मानव संसाधन, बेहतर लॉजिस्टिक्स नेटवर्क, राजनीतिक स्थिरता और मजबूत आधारभूत ढांचा उपलब्ध है, जो इसे निवेश के लिए आदर्श बनाता है।
- एफडीआई आंकड़ों ने दिखाया सुधार की बड़ी संभावनाएं
डीपीआईआईटी के आंकड़ों का हवाला देते हुए डॉ. सिंह ने बताया कि अक्टूबर 2019 से दिसंबर 2025 के बीच भारत में प्राप्त एफडीआई का बड़ा हिस्सा कुछ चुनिंदा राज्यों में केंद्रित रहा। महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात, दिल्ली, तमिलनाडु, हरियाणा और तेलंगाना जैसे राज्यों की तुलना में उत्तर प्रदेश को केवल ₹23,158 करोड़ का निवेश प्राप्त हुआ, जो कुल राज्यवार एफडीआई निवेश का लगभग एक प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि यह अंतर प्रदेश की क्षमता की कमी नहीं, बल्कि उसकी संभावनाओं को वैश्विक निवेशकों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने की चुनौती को दर्शाता है।
- निवेश आकर्षित करने के लिए पांच सूत्रीय रणनीति
डॉ. राजेश्वर सिंह ने उत्तर प्रदेश को निवेश का प्रमुख केंद्र बनाने के लिए पांच महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। इनमें मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में ग्लोबल इन्वेस्टर वॉर रूम का गठन, देशवार और कंपनीवार एफडीआई रणनीति तैयार करना, सेक्टर आधारित वैश्विक क्लस्टर और एफडीआई-रेडी जिलों का विकास, एंकर-प्लस-सप्लायर मॉडल तथा कौशल विकास तंत्र को मजबूत करना और निवेशकों के लिए बेहतर ब्रांडिंग व आफ्टरकेयर व्यवस्था विकसित करना शामिल है।
- प्रमुख देशों और उभरते क्षेत्रों पर विशेष फोकस का सुझाव
उन्होंने सुझाव दिया कि उत्तर प्रदेश को जापान, दक्षिण कोरिया, अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, यूएई, सिंगापुर और ताइवान जैसे देशों को लक्ष्य बनाकर निवेश आकर्षित करने की रणनीति तैयार करनी चाहिए। साथ ही इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक वाहन, रक्षा एवं एयरोस्पेस, डेटा सेंटर, खाद्य प्रसंस्करण, पर्यटन, लॉजिस्टिक्स और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
- निवेश घोषणाओं से आगे बढ़कर रोजगार सृजन पर जोर
डॉ. सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश की अगली आर्थिक छलांग केवल निवेश समझौतों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि वास्तविक उद्योगों की स्थापना, निर्यात वृद्धि, सेवा केंद्रों के विस्तार और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन पर केंद्रित होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सुशासन, आधारभूत ढांचे और कुशल मानव संसाधन के बल पर प्रदेश आर्थिक विकास की नई ऊंचाइयों को छू सकता है।
- विकसित भारत के लिए विकसित उत्तर प्रदेश जरूरी
डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि विकसित उत्तर प्रदेश के बिना विकसित भारत की परिकल्पना अधूरी है। उन्होंने “मिशन FDI-UP” को राज्य का प्रमुख आर्थिक मिशन बनाने और अगले पांच वर्षों में उत्तर प्रदेश को देश के शीर्ष पांच एफडीआई गंतव्यों में शामिल करने का लक्ष्य निर्धारित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
