राजेश्वर सिंह की लोकप्रियता भारी, फिर भी जातीय समीकरणों ने रोका मंत्री पद

Lucknow
  • राजेश्वर सिंह की लोकप्रियता भारी, फिर भी जातीय समीकरणों ने रोका मंत्री पद

लखनऊ। देश की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी आज सबसे बड़े राजनीतिक दल के रूप में स्थापित हो चुकी है। पार्टी की सबसे बड़ी ताकत उसका व्यापक सामाजिक आधार माना जाता है। भाजपा ने पिछले एक दशक में केवल शहरी वर्ग ही नहीं बल्कि गांव, गरीब, पिछड़े, दलित और विभिन्न जातीय समूहों के बीच भी मजबूत पकड़ बनाई है। यही कारण है कि पार्टी लगातार चुनावी सफलता हासिल करती रही है और कई राज्यों में उसका प्रभाव लगातार बढ़ता जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा ने संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर सामाजिक संतुलन बनाने की रणनीति पर लगातार काम किया है। पार्टी विभिन्न वर्गों को प्रतिनिधित्व देकर अपने जनाधार को और मजबूत करने की कोशिश करती रही है।

अगर उत्तर प्रदेश की राजनीति की बात करें तो यहां जातीय समीकरण हमेशा से सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। किसी भी राजनीतिक दल के लिए चुनावी रणनीति तैयार करते समय जातीय संतुलन सबसे बड़ा आधार माना जाता है। मंत्री पद से लेकर संगठन के बड़े पदों तक जातिगत प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखा जाता है ताकि सभी वर्गों को राजनीतिक भागीदारी का संदेश दिया जा सके। प्रदेश की राजनीति में यह धारणा लंबे समय से बनी हुई है कि जिस जाति का जितना प्रभाव होता है, उसे उसी हिसाब से सत्ता और संगठन में हिस्सेदारी देने का प्रयास किया जाता है। यही वजह है कि मंत्रिमंडल गठन और विस्तार के समय सामाजिक समीकरणों पर विशेष मंथन किया जाता है।

राजधानी के राजनीतिक गलियारों में कल होने वाले संभावित मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर चर्चाएं तेज हैं। माना जा रहा है कि मंत्री परिषद के विस्तार में भी भाजपा नेतृत्व सामाजिक और जातीय संतुलन को प्राथमिकता देगा। पार्टी की कोशिश होगी कि विभिन्न क्षेत्रों और जातियों को प्रतिनिधित्व देकर व्यापक संतुलन बनाया जाए। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि इसके पीछे एक बड़ा कारण विपक्ष की जाति आधारित राजनीति भी है। विपक्ष लगातार सामाजिक न्याय और जातीय प्रतिनिधित्व के मुद्दों को उठाकर अपनी राजनीति को धार देने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में भाजपा भी सभी वर्गों को साथ लेकर चलने का संदेश देना चाहती है ताकि विपक्ष के आरोपों और रणनीति को संतुलित किया जा सके।

डॉ. राजेश्वर सिंह को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं। पूर्व पुलिस अधिकारी रहे डॉ. राजेश्वर सिंह ने विधायक बनने के बाद सरोजनी नगर क्षेत्र में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और जनसंपर्क से जुड़े कई कार्यों के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई है। क्षेत्रीय जनता के बीच उनकी सक्रियता और उपलब्धता को लेकर संतोष का माहौल देखा जाता है। हालांकि राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी है कि उनके कार्यों की सराहना होने के बावजूद मंत्रिमंडल में जगह मिलने की संभावना जातीय समीकरणों के कारण प्रभावित हो सकती है। माना जा रहा है कि उनकी जाति से जुड़े कई नेता पहले से महत्वपूर्ण पदों पर मौजूद हैं और स्वयं मुख्यमंत्री भी उसी समाज से आते हैं। ऐसे में पार्टी सामाजिक संतुलन बनाए रखने के लिए अन्य जातियों को प्रतिनिधित्व देने पर अधिक जोर दे सकती है।