बरेली टू काठगोदाम पहली रेलगाड़ी कब दौड़ी थी ? सामान्य ज्ञान से जुड़े इस सवाल का उत्तर जानने को 136 साल पहले की कहानी समझनी होगी। रुहेलखंड के मैदान से कुमायूं के पहाड़ों को जोड़ने वाली रेलवे लाइन का निर्माण ब्रिटिश पीरियड में 1880 के दशक में शुरू हुआ था। 24 अप्रैल 1884..यही वो तारीख थी, जब लखनऊ से चलकर बरेली होती हुई पहली ट्रेन काठगोदाम पहुंची थी।
142 बरस पहले इस भूभाग पर अंग्रेज जहां छोड़कर गए थे, ट्रेन उससे एक इंच भी ऊपर नहीं बढ़ी है। बड़ी खबर ये है कि बरेली से पहाड़ की ओर रेल नेटवर्क विस्तार पर फिर शुरू हो रहा है। बागेश्वर तक ट्रेन पहुंचाने की दिशा में नए सिरे से तैयारियां तेज हुई हैं। रेल बजट में प्रावधान होने के बाद जल्द सर्वे शुरू होने वाला है।
इज्जतनगर रेल मंडल के पास नेटवर्क विस्तार का मसौदा पहुंच चुका है, जिसके बाद परियोजना के प्रारंभिक चरण में तेजी आने की उम्मीद बंधी है। यह परिकल्पना अंग्रेज सरकार की तैयारी थी मगर समय के बाद फाइलें आगे बढ़ने की जगह पीछे घिसटती रहीं। बरेली-कुमायूं रेल लाइन का इतिहास करीब करीब डेढ़ सदी पुराना है। 1890 में अंग्रेजों ने पहली बार टनकपुर-बागेश्वर रेल मार्ग का सर्वे कराया था। 1902 और 1911-12 में भी परियोजना पर थोड़ा काम हुआ मगर उसके बाद शिमला और दार्जिलिंग की तरह दुर्गम पहाड़ों पर ट्रेन दौड़ाने की योजना सपना बनकर ही रह गई।
अफसरों के मुताबिक, केन्द्र सरकार अब इस परियोजना में बहुत दिलचस्पी ले रही है। बरेली-उत्तराखंड के बीच रेल संपर्क को मजबूत बनाने के लिए केन्द्र ने नई रूपरेखा तैयार की है। टनकपुर से बागेश्वर और आगे रीठा साहिब तक रेल लाइन बिछाने की योजना पर काम शुरू हो चुका है। यह परियोजना धरातल पर उतरती है, तो रुहेलखंड की सामाजिक, आर्थिक धुरी बरेली के कुमायूं और करीब आ जाएगा। ऐसा हुआ तो दोनों ओर पर्यटन, व्यापार और अर्थव्यवस्था को पंख लग जाएंगे। वर्षों से लंबित इस महत्वाकांक्षी रेल योजना पर फिर काम शुरू होने की खबर ने क्षेत्र के लोगों में नई उम्मीद जगा दी है।
