- बीबीएयू में चार दिवसीय अम्बेडकर जयंती एवं स्थापना दिवस समारोह का भव्य शुभारंभ, पहले दिन मनाई गई महात्मा ज्योतिबा फुले जयंती
लखनऊ। बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में 11 से 14 अप्रैल तक आयोजित चार दिवसीय ‘अम्बेडकर जयंती’ एवं ‘विश्वविद्यालय स्थापना दिवस समारोह’ का शुभारंभ शनिवार को उत्साहपूर्ण वातावरण में हुआ। कार्यक्रम का उद्घाटन कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने किया। पहले दिन महात्मा ज्योतिबा फुले जयंती के अवसर पर ‘शिक्षा ही समावेशी विकास का आधार’ विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व राज्य मंत्री, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार डॉ. संजय पासवान उपस्थित रहे। मंच पर कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल के साथ विशिष्ट अतिथि प्रो. सदानंद के. भोंसले, आयोजन समिति की अध्यक्ष प्रो. शूरा दारापुरी तथा वक्ता प्रो. एम. रवि कुमार मौजूद रहे। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन एवं डॉ. भीमराव अंबेडकर के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई।
आईक्यूएसी निदेशक प्रो. शिल्पी वर्मा ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की, जबकि मंच संचालन डॉ. सूफिया अहमद ने किया।
मुख्य अतिथि डॉ. संजय पासवान ने अपने संबोधन में कहा कि समाज परिवर्तन के लिए उसकी समस्याओं को समझना आवश्यक है। उन्होंने महात्मा ज्योतिबा फुले को डॉ. अंबेडकर के प्रमुख प्रेरणास्रोतों में से एक बताते हुए उनके योगदान को याद किया। साथ ही “PHULE” और “GLAD” जैसी अवधारणाओं के माध्यम से समानता, शिक्षा और सामाजिक न्याय का संदेश दिया।
कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने महात्मा फुले के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि शिक्षा समाज परिवर्तन का सबसे सशक्त माध्यम है। उन्होंने युवाओं को आत्मनिर्भर बनने, उद्यमिता अपनाने, मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देने तथा तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का सकारात्मक उपयोग करने के लिए प्रेरित किया।
विशिष्ट अतिथि प्रो. सदानंद के. भोंसले ने संत परंपरा और सामाजिक परिवर्तन की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए महिलाओं की शिक्षा और संस्कार निर्माण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। आयोजन समिति की अध्यक्ष प्रो. शूरा दारापुरी ने शिक्षा, समानता और सामाजिक न्याय के महत्व को बताते हुए महात्मा फुले के ऐतिहासिक योगदान को विस्तार से रखा।
वक्ता प्रो. एम. रवि कुमार ने कहा कि सामाजिक असमानता समाप्त किए बिना वास्तविक प्रगति संभव नहीं है। उन्होंने समान अवसर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को समाज निर्माण की आधारशिला बताया।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के इलेक्ट्रॉनिक मल्टीमीडिया रिसर्च सेंटर द्वारा महात्मा फुले के जीवन पर आधारित प्रेरणादायक वृत्तचित्र का प्रदर्शन किया गया। साथ ही ग्रामीण उद्योग, हस्तशिल्प एवं लोक उत्पादों पर आधारित प्रदर्शनी भी आकर्षण का केंद्र रही।
कार्यक्रम के अंत में अतिथियों को स्मृति चिन्ह एवं अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया तथा डॉ. सुभाष मिश्रा ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
इसके साथ ही विद्यार्थियों के लिए ‘समावेशी विकास, विकसित भारत का आधार’ विषय पर आशुभाषण प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें डॉ. सिद्धार्थ शंकर राय, डॉ. प्रीति चौधरी एवं डॉ. विभूति नारायण निर्णायक रहे। इसके अतिरिक्त ‘डॉ. भीमराव अंबेडकर: सामाजिक न्याय के शिल्पकार’ विषय पर स्लोगन प्रतियोगिता भी आयोजित की गई।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे, जिससे परिसर में उत्सव का माहौल बना रहा।
