सिर्फ 100 रुपये में भारतीय बन जाते थे ये पाकिस्तानी-बांग्लादेशी

International

बगैर भारतीय नागरिकता हासिल किए पाकिस्तान, बांग्लादेश से आकर वर्षों से गोरखपुर में रह रहे मुस्लिम और हिंदू अब फिक्रमंद हो गए हैं। करीब 50-60 सालों ये लोग लांग टर्म वीजा (एलटीवी) पर रह रहे हैं। अब तक हर साल ये लोग 100 रुपये शुल्क देकर वीजा नवीनीकरण कराते हैं। लेकिन नागरिकता संशोधन विधेयक पास होने के बाद अब सभी ने भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन किया है।

नागरिकता संशोधन विधेयक पास होने के बाद एलआईयू की ओर से पाकिस्तान, बांग्लादेश से आए लोगों को एक बार फिर नागरिकता लेने के लिए नोटिस जारी किया गया है। हिंदू परिवार तो खुश हैं लेकिन मुस्लिम परिवार चिंतित हैं। मुस्लिम परिवारों का कहना है कि अब तक वीजा नवीनीकरण करा लेते थे लेकिन अब तय प्रक्रिया के तहत नागरिकता मांगी गई है।
एलआईयू के सीओ जगदीश सिंह ने बताया कि इन लोगों का हर साल वीजा नवीनीकरण होता था। अब सभी ने नागरिकता के लिए आवेदन किया है। नए विधेयक के तहत इसकी प्रक्रिया शुरू करा दी गई है। गोरखपुर में छह पाकिस्तानी और आठ बांग्लादेशी नागरिक रहते हैं। विदेशी मामलों के कामकाज की जिम्मेदारी चंदन सिंह को दी गई है। वह लगातार मानीटरिंग करके रिपोर्ट तैयार करते हैं।
पाकिस्तानी नागरिक
रमादेवी पाठक, सनोरा थाना कैंपियरगंज। यह 1981 में गोरखपुर आई थीं और यहां योगेंद्र पाठक से शादी करके एलटीवी वीजा पर रहती हैं।
बसंत कुमार बढ़िया चौक, पीपीगंज। 1983 में भारत आए थे, और रामादेवी के सगे भाई हैं ।
नाहिद बानो पत्नी दिवंगत अब्दुल मन्ना, इलाहीबाग, तिवारीपुर, 1971 में भारत में आई थीं। एलटीवी वीजा पर रह रही हैं।
निगहत अनीश पत्नी शमीम, जाफरा बाजार, तिवारीपुर। 1983 में आई थीं।
रईसा खातून पत्नी सनाउल्लाह, दुर्गाबाड़ी, कोतवाली। 1959 में गोरखपुर आई थीं। इनकी माता भी आई थी उनका निधन हो गया।
नासिरा खातून पत्नी दिवंगत मोहम्मद फारूख, भटपुरवा घासी कटरा, तिवारीपुर। 1982 में गोरखपुर आईं थीं।
बांग्लादेशी नागरिक
इशरत फातिमा पत्नी ओबेदुल्ला। निवासी जाफरा बाजार, तिवारीपुर। 1980 में गोरखपुर आईं।
नगमा अजीज पत्नी शहजादे, मोहल्ला मोहनलालपुर, तिवारीपुर। 1979 में गोरखपुर आईं।
मुजाहिद अजीज पत्नी मोहम्मद हाफिज, जंगल तुलसीराम बिछिया। 1979 गोरखपुर आईं।
निगहत अजीज पत्नी आफताब आलम, तुर्कमानपुर, राजघाट। 1979 गोरखपुर आईं।
आसमा आमद पत्नी डॉ इकबाल, तुर्कमानपुर, राजघाट। वर्ष 2009 में गोरखपुर आईं।
शमीम अहमद पत्नी मोहम्मद अबू अयूब, तुर्कमानपुर। वर्ष 2009 में गोरखपुर आईं।
भागीरथी पत्नी दिवंगत राजमल, दुगौली, सिकरीगंज। वर्ष 1971 में आईं।
गणेश प्रसाद, ओझोली, बड़हलगंज। 1982 से गोरखपुर में रह रहे हैं।
50 साल से आठ लापता पाकिस्तानी नागरिकों की खोज जारी
70 के दशक में टूरिस्ट वीजा पर आए आठ पाकिस्तानी कहां गए इसका पता 50 साल में भी पुलिस, एलआईयू नहीं लगा सकी हैं। खुफिया एजेंसियां हर साल अभियान चलाकर तस्दीक करना चाहती हैं कि उनकी मृत्यु हो गई या फिर उनके वंशज कहीं छिपकर तो नहीं रह रहे हैं मगर इसका ठोस प्रमाण आज तक नहीं हासिल हो सका है।

अब एलआईयू भी यह मान चुकी है कि उनकी उम्र अब 90 से ऊपर होगी और ज्यादातर की मृत्यु हो गई होगी। लेकिन वंशज हैं या नहीं इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। जानकारी के मुताबिक आठ पाकिस्तानी नागरिक गोरखपुर में किराए के कमरे में रहने लगे थे। इस दौरान इसका वीजा खत्म हो गया था। इसके बाद से ही सभी दर्ज पते से गायब हो गए थे।