शादियों में घटे पकवान, भंडारा स्थगित, भोग-प्रसाद पर संकट, रामनगरी तक पहुंची ईरान जंग की आग

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कॉमर्शियल सिलेंडर की किल्लत ने शहर की सामाजिक, धार्मिक और व्यावसायिक जिंदगी को प्रभावित कर दिया है। शादियों के सीजन में यह समस्या सबसे ज्यादा सतह पर आई है। सिलेंडर न मिलने से कैटरर्स और परिवारों को मजबूरन मेन्यू छोटा करना पड़ रहा है। होटल-रेस्टोरेंट व्यवसाय पर भी काले बादल मंडरा रहे हैं। राम मंदिर के निकट अमावा मंदिर में चलने वाली प्रसिद्ध राम रसोई को मंगलवार को आपात स्थिति में स्थगित कर दिया गया।

मंदिर प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि युद्ध के कारण रसोई गैस की भारी कमी है, जिससे हजारों श्रद्धालुओं को नि:शुल्क भोजन वितरण प्रभावित हुआ है। इसी तरह हनुमानगढ़ी में भोग-प्रसाद तैयार करने में भी दिक्कत आ रही है। मंदिरों में दैनिक भोग के लिए इस्तेमाल होने वाली गैस की आपूर्ति बाधित होने से प्रसाद की मात्रा और गुणवत्ता दोनों प्रभावित हो रही है। गुरुद्वारा नजरबाग के ज्ञानी रीशू बताते हैं कि उनके यहां भी रोजाना 250 से 300 लोग लंगर छकते हैं। गैस किल्लत ने संकट में डाल ही दिया है। हालांकि ईश्वर सब सही करेंगे।

वहीं घरेलू स्तर पर आम लोग भी परेशान हैं। सिलेंडर बुक कराने में मारामारी मची हुई है। पहले जहां 2-3 दिनों में रिफिल मिल जाता था, अब एक सप्ताह या उससे ज्यादा इंतजार करना पड़ रहा है। कई एजेंसियों पर लंबी कतारें लगी हैं और कुछ जगह बुकिंग रद्द करके लोग लौटाए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह संकट लंबा खिंचा तो शादियों, भंडारों और धार्मिक आयोजनों के अलावा स्थानीय व्यापार को भी बड़ा नुकसान होगा। प्रशासन से मांग है कि तत्काल आपातकालीन आपूर्ति बढ़ाई जाए और वैकल्पिक इंतजाम किए जाएं।

अब पांच से छह सिलेंडर में ही चला रहे काम

सिलेंडर की किल्लत का बड़ा असर पड़ रहा है। शादियों में आइटम की संख्या लोग कम कर रहे हैं। लोग यहां शादियों में बड़ा मेन्यू रखते हैं। काफी खर्चा करते हैं। इसी कारण शादियों में 12 से 14 सिलेंडर लग जाते हैं, लेकिन दिक्कत बढ़ जाने के कारण 5 से 6 सिलेंडर में ही काम चलाया जा रहा है।-सुरेश यादव, कैटरर्स, अयोध्या

2019 से अनवरत चल रहा था भंडारा

अमावा मंदिर में एक दिसंबर 2019 से अनवरत भंडारा चल रहा है। 10 से 15 हजार लोग राम रसोई में तीनों समय प्रसाद ग्रहण करते हैं। वर्तमान में खाड़ी देशों में चल रहे युद्ध के कारण गैस की किल्लत हो रही है। इसलिए मंगलवार दोपहर दो बजे से हम लोग खाना बंद कर रहे हैं। यहां एजेंसी वाले गैस नहीं दे रहे हैं। ऐसे में हम लोग अब कुछ नहीं कर सकते। युद्ध लंबा चला तो लोगों को कुछ नया विकल्प तलाश करना पड़ेगा।-पंकज कुमार, प्रबंधक, अमावा मंदिर ट्रस्ट।