- लखनऊ में पर्वतीय समाज ने हर्षोल्लास से मनाया फूलदेई पर्व
- चैत्र संक्रांति पर बच्चों ने घर-घर जाकर देहरी पर बिखेरे फूल, प्रकृति पूजा के साथ दी सुख-समृद्धि की कामना
लखनऊ। चैत्र संक्रांति के अवसर पर रविवार को राजधानी लखनऊ में उत्तराखंड के पर्वतीय समाज ने पारंपरिक लोकपर्व फूलदेई (फूल संक्रांति) को हर्षोल्लास और उत्साह के साथ मनाया। इस अवसर पर पर्वतीय जनजागृति समिति, तेलीबाग के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में बच्चों ने घर-घर जाकर देहरी पर रंग-बिरंगे फूल बिखेरे और परिवारों की सुख-समृद्धि की कामना की। समिति के अध्यक्ष मोहन भट्ट ने बताया कि उत्तराखंड की लोकसंस्कृति में फूलदेई पर्व बसंत ऋतु के आगमन और प्रकृति के नवजीवन का प्रतीक माना जाता है। इस दिन बच्चे सुबह जंगलों और बगीचों से बुराँस, फ्योंली, सरसों, आड़ू और खुबानी सहित विभिन्न फूल एकत्र कर घरों और मंदिरों की देहरी पर अर्पित करते हैं।
पर्व के दौरान बच्चों ने पारंपरिक गीत
“फूलदेई-फूल देई, छम्मा देई,
दैणी द्वार भर भकार, यो देई सौं बारंबार नमस्कार”
गाते हुए घर-घर जाकर लोगों को शुभकामनाएं दीं। इसके बदले में लोगों ने बच्चों को गुड़, चावल, मिठाई और दक्षिणा देकर आशीर्वाद दिया। समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि यह पर्व प्रकृति के प्रति आस्था और संरक्षण का संदेश देता है। उत्तराखंड की संस्कृति में चैत्र माह भिटौली परंपरा के लिए भी जाना जाता है, जिसमें भाई अपनी विवाहित बहनों को उपहार और मिठाइयां भेजते हैं। इस अवसर पर पर्वतीय समाज के अनेक लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम में पारंपरिक व्यंजन भी बनाए गए और लोगों ने एक-दूसरे के साथ साझा कर पर्व की खुशियां मनाईं।
