श्रद्धा दुबे केस पर अखिलेश का तंज: यह मामला सरकार को ले डूबेगा

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कारोबारी शिवा शर्मा की संदिग्ध मौत और फरार चल रही चर्चित मॉडल श्रद्धा दुबे प्रकरण ने उत्तर प्रदेश की सियासत में भूचाल ला दिया है। लखनऊ के हजरतगंज इलाके में हुई इस सनसनीखेज घटना के बाद से पुलिस की लचर कार्यप्रणाली और नाकामी लगातार सवालों के घेरे में थी। अब इस मामले को लेकर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने योगी सरकार पर बेहद तीखा और बड़ा हमला बोला है। अखिलेश यादव ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यह कोई सामान्य मामला नहीं है, बल्कि यह चर्चित केस अंततः इस सरकार को ले डूबेगा।

सपा मुख्यालय पर मीडिया से बात करते हुए अखिलेश यादव ने इस पूरे प्रकरण की तुलना कानपुर के कुख्यात बिकरू कांड से कर डाली। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि उस समय भी अपराधियों की गाड़ी नहीं पलटी थी और सरकार को बचाया गया था, यह मामला भी कुछ वैसा ही प्रतीत होता है। अखिलेश यादव का यह बयान ऐसे समय में आया है जब इस हाईप्रोफाइल केस में लगातार नए खुलासे हो रहे हैं और मुख्य आरोपी मॉडल श्रद्धा दुबे का कनेक्शन कई रसूखदारों और नामचीन चेहरों के साथ सामने आ रहा है।

इंटरव्यू और वीडियो ने बढ़ाई पुलिस की मुश्किलें

हैरानी की बात यह है कि घटना के इतने दिन बीत जाने और पुलिस द्वारा मुख्य आरोपी पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित करने के बाद भी खाकी उसे ढूंढने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई है। एक तरफ जहां पुलिस श्रद्धा की तलाश में हाथ-पैर मार रही है, वहीं दूसरी तरफ पुलिस को खुली चुनौती देते हुए श्रद्धा लगातार एक के बाद एक वीडियो जारी कर रही है। हद तो तब हो गई जब फरार चल रही आरोपी श्रद्धा ने एक प्रमुख समाचार एजेंसी को इंटरव्यू तक दे दिया। इस घटना के बाद से यूपी पुलिस की देश भर में जमकर फजीहत और किरकिरी हुई है। मृत कारोबारी शिवा को धमकाते हुए श्रद्धा का पुराना वीडियो और वायरल ऑडियो पहले ही सनसनी फैला चुके हैं, जिसमें वह किसी ‘सर’ से शिकायत करने की बात कहती नजर आ रही थी।

शासन का बड़ा एक्‍शन: एक आईपीएस समेत तीन अधिकारी नपे

फरार मॉडल द्वारा मीडिया में बेखौफ इंटरव्यू दिए जाने और पुलिस की भारी जगं हंसाई होने के बाद आखिरकार शासन ने सख्त रुख अख्तियार किया है। पुलिस विभाग की साख बचाने के लिए सरकार ने एक आईपीएस अधिकारी समेत तीन बड़े पुलिस अफसरों पर गाज गिरा दी है। शासन द्वारा की गई इस बड़ी कार्रवाई के तहत डीसीपी पूर्वी विक्रांत वीर को उनके पद से हटाते हुए सीधे डीजीपी मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया है। इसके अलावा, लचर कानून-व्यवस्था और लापरवाही के चलते हजरतगंज कोतवाली के इंस्पेक्टर विक्रम सिंह को भी लाइन हाजिर कर दिया गया है। वहीं, कार्यप्रणाली पर सवाल उठने के बाद एसीपी रजनीश वर्मा को भी हजरतगंज सर्किल से हटाकर एसीपी क्राइम के पद पर भेज दिया गया है।

क्या है पूरा मामला?

बीती 9 अक्टूबर को लखनऊ के एक हाई-राइज फ्लैट से संदिग्ध परिस्थितियों में गिरकर कारोबारी शिवा शर्मा की दर्दनाक मौत हो गई थी। इस मामले में मृतक कारोबारी की मां ने मॉडल श्रद्धा दुबे, उसकी बहन समेत चार लोगों के खिलाफ बेटे को ऊपर से धक्का देकर हत्या करने का गंभीर आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई थी। परिवार का आरोप है कि शिवा के मोबाइल फोन में श्रद्धा दुबे के कई काले कारनामों और राज के सबूत दर्ज हैं। फिलहाल, एसआईटी और पुलिस इस मामले की हर एंगल से गहराई से छानबीन कर रही है, लेकिन मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी न होना और उस पर राजनीतिक दलों का हमलावर होना इस मामले को राज्य का सबसे बड़ा और संवेदनशील राजनीतिक मुद्दा बना चुका है।