- नो पार्किंग कार्रवाई पर उठे सवाल : बैंक-अस्पताल और स्कूलों के बाहर से भी उठाई जा रहीं गाड़ियां
लखनऊ। शहर में यातायात व्यवस्था सुधारने के उद्देश्य से चलाए जा रहे नो पार्किंग अभियान को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि नो पार्किंग जोन में खड़े वाहनों पर कार्रवाई की आड़ में बैंक, अस्पताल और स्कूलों के बाहर खड़ी गाड़ियों को भी उठाया जा रहा है, जिससे आम लोगों और वाहन स्वामियों में नाराजगी बढ़ रही है।
- जोन-8 में सामने आए कई मामले
स्थानीय लोगों के अनुसार जोन-8 क्षेत्र में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां वैध रूप से खड़े वाहनों को भी क्रेन के जरिए उठाकर ले जाया गया। वाहन स्वामियों का कहना है कि कई स्थानों पर स्पष्ट नो पार्किंग संकेतक भी नहीं लगे हैं, इसके बावजूद कार्रवाई की जा रही है।
- पहले भी मिल चुकी हैं शिकायतें
जानकारी के मुताबिक, जबरन वाहन उठाने को लेकर पहले भी कई शिकायतें की जा चुकी हैं। लोगों का आरोप है कि कार्रवाई के दौरान मौके पर पर्याप्त जानकारी नहीं दी जाती और वाहन छुड़ाने के लिए तुरंत चालान शुल्क जमा कराने का दबाव बनाया जाता है।
- चालान व्यवस्था पर भी सवाल
वाहन स्वामियों का कहना है कि सामान्य ट्रैफिक चालान मोबाइल पर आने के बाद व्यक्ति अपनी सुविधा से जुर्माना जमा करता है, लेकिन नगर निगम द्वारा उठाए गए वाहनों के मामले में शुल्क तत्काल जमा करना अनिवार्य कर दिया जाता है। इसे लेकर लोग अलग नियम लागू होने पर सवाल उठा रहे हैं।
- व्यवस्था सुधार की मांग
स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों ने मांग की है कि स्पष्ट नो पार्किंग चिन्ह लगाए जाएं, संवेदनशील स्थानों जैसे अस्पताल, बैंक और स्कूलों के बाहर मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाए तथा कार्रवाई की पारदर्शी गाइडलाइन सार्वजनिक की जाए।
- नगर निगम की भूमिका पर चर्चा
लोगों का कहना है कि यातायात सुधार जरूरी है, लेकिन कार्रवाई नियमों के अनुरूप और संतुलित होनी चाहिए, ताकि आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानी न हो। मामले को लेकर लखनऊ नगर निगम की कार्यप्रणाली पर भी चर्चा तेज हो गई है और प्रशासन से स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग उठ रही है। स्थानीय नागरिकों का मानना है कि यदि नियमों का पालन पारदर्शी तरीके से कराया जाए तो अभियान का उद्देश्य भी पूरा होगा और जनता का भरोसा भी बना रहेगा।
