क्या है नाथ संप्रदाय, जान लें कौन हैं इसके संस्थापक

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अब अयोध्या में साधु पर हमला हुआ है। यह साधु नाथ संप्रदाय का बताया जा रहा है। अयोध्या में हमला हुआ है। प्याउ के पास थूकने को लेकर साधु ने मना किया तो लोगों ने हमला किया। संत को इलाज के लिए हॉस्पिटल भेजा गया है। आपको बता दें कि इससे पहले बुलंदशहर और पालघर में संतों पर हमलें और हत्या के मामले सामने आ चुके हैं।

नाथ संप्रदाय भारत का एक हिंदू धार्मिक पंथ है। नाथ योगियों की परंपरा बहुत ही प्राचीन रही है।मध्ययुग में उत्पन्न इस सम्प्रदाय में बौद्ध, शैव तथा योग की परम्पराओं का समन्वय दिखायी देता है। यह हठयोग की साधना पद्धति पर आधारित पंथ है। … गुरु गोरखनाथ ने इस सम्प्रदाय के बिखराव और इस सम्प्रदाय की योग विद्याओं का एकत्रीकरण किया, अतः इसके संस्थापक गोरखनाथ माने जाते हैं।

भारत में नाथ सम्प्रदाय को सन्यासी, योगी, जोगी, नाथ, अवधूत, कौल, उपाध्याय (पश्चिम उत्तर प्रदेश में), आदि नामों से जाना जाता है। इनके कुछ गुरुओं के शिष्य मुसलमान, जैन, सिख और बौद्ध धर्म के भी थे। इस पंथ के लोगो को शिव का वंशज माना जाता है ।

नाथ सम्प्रदाय के प्रमुख गुरु
आदिगुरू :- भगवान शिव (हिन्दू देवता)
मच्छेन्द्रनाथ :- 8वीं या 9वीं सदी के योग सिद्ध, “तंत्र” परंपराओं और अपरंपरागत प्रयोगों के लिए मशहूर
गोरक्षनाथ (गोरखनाथ) :- 10वीं या 11वीं शताब्दी में जन्म, मठवादी नाथ संप्रदाय के संस्थापक, व्यवस्थित योग तकनीकों, संगठन , हठ योग के ग्रंथों के रचियता एवं निर्गुण भक्ति के विचारों के लिए प्रसिद्ध।

9 नाथों की परंपरा से 84 नाथ हुए।
नाथ संप्रदाय हिंदु धर्म का अभिन्न अंग है।
नाथ का अर्थ होता है स्वामी।
मान्यता है कि नाग शब्द बिगड़कर नाथ बना है।