- विद्यालयों में समाचार पत्र पठन अनिवार्य करना शिक्षा सुधार की दिशा में ऐतिहासिक कदम: प्रो. मंजुला उपाध्याय
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा विद्यालयों में विद्यार्थियों के लिए समाचार पत्र पढ़ना अनिवार्य किए जाने के निर्णय को शिक्षा जगत में व्यापक समर्थन मिल रहा है। इस पहल को विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास से जोड़ते हुए नवयुग कन्या महाविद्यालय, लखनऊ की प्राचार्य एवं वरिष्ठ शिक्षाविद प्रो. मंजुला उपाध्याय ने इसे एक दूरदर्शी और समयानुकूल निर्णय बताया है।
प्रो. मंजुला उपाध्याय ने कहा कि आज के दौर में जब बच्चे मोबाइल, टीवी और सोशल मीडिया के अत्यधिक प्रभाव में हैं, ऐसे समय में समाचार पत्र पठन की आदत उन्हें गंभीर अध्ययन और सोच-विचार की ओर ले जाएगी। समाचार पत्र बच्चों को देश-दुनिया की घटनाओं से जोड़ता है और समसामयिक विषयों की समझ विकसित करता है, जो उनके सामान्य ज्ञान के साथ-साथ बौद्धिक विकास के लिए भी अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि नियमित रूप से शांत होकर बैठकर पढ़ने की आदत बच्चों में एकाग्रता और धैर्य विकसित करती है। वर्तमान समय में विद्यार्थियों में एकाग्रता की कमी एक गंभीर समस्या बनती जा रही है, और समाचार पत्र पठन इस समस्या के समाधान में सहायक हो सकता है। यह बच्चों को त्वरित और सतही जानकारी की बजाय गहन अध्ययन की ओर प्रेरित करेगा।
प्रो. उपाध्याय ने यह भी कहा कि समाचार पत्र पढ़ने से बच्चों में भाषा दक्षता, शब्द भंडार और अभिव्यक्ति कौशल में सुधार होगा। साथ ही यह आदत उन्हें पुस्तकों और साहित्य के प्रति भी आकर्षित कर सकती है, जिससे अध्ययन की संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने सुझाव दिया कि विद्यालयों में समाचार पत्र पठन को केवल औपचारिक गतिविधि न बनाया जाए, बल्कि इसे संवादात्मक और रचनात्मक बनाया जाए। स्कूल का निर्धारित समय केवल पढ़ने तक सीमित न हो, बल्कि चयनित समाचारों, संपादकीय और महत्वपूर्ण घटनाओं पर शिक्षक और छात्रों के बीच चर्चा कराई जाए। इससे बच्चों में तर्कशक्ति, विश्लेषण क्षमता और लोकतांत्रिक सोच विकसित होगी।
प्रो. मंजुला उपाध्याय ने यह भी कहा कि प्रत्येक सप्ताह समसामयिक विषयों पर प्रश्नोत्तरी, वाद-विवाद, समूह चर्चा और लघु प्रस्तुतियों का आयोजन किया जाना चाहिए। इससे बच्चों की सहभागिता बढ़ेगी और वे समाचारों को केवल पढ़ेंगे ही नहीं, बल्कि उन्हें समझेंगे और आत्मसात भी करेंगे।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यदि इस योजना को गंभीरता और सुनियोजित ढंग से लागू किया गया, तो यह अभियान शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के साथ-साथ जागरूक, जिम्मेदार और संवेदनशील नागरिकों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह पहल नई पीढ़ी को सूचना के शोर से निकालकर ज्ञान की सही दिशा में ले जाने का सशक्त माध्यम बन सकती है।
