राज्य सरकार के लिए सभी बालिकाएं वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई का प्रतीक हैं:मुख्यमत्री

# ## Lucknow
  • मुुख्यमंत्री ने महारानी लक्ष्मीबाई के 192वें जन्म दिवस पर दैनिक जागरण समूह के तत्वावधान में झांसी में आयोजित ‘दीपांजलि’ वेबिनार को सम्बोधित किया
  • महारानी लक्ष्मीबाई ने विदेशी हुकूमत के सामने नारी शक्ति का जिस रूप में प्रस्तुतीकरण किया, वह अविस्मरणीय है: मुख्यमंत्री
  • हमारे इतिहास में ऐसी अनेक महिलाओं का सन्दर्भ मिलता है, जिन्होंने अपने व्यक्तित्व और कृतित्व से उपलब्धियों के उच्चतम आयाम स्थापित किए
  • वर्तमान में अनेक महिलाएं और बालिकाएं अपनी प्रतिभा, ज्ञान और कर्मठता से सफलता के नये उदाहरण प्रस्तुत कर रही हैं
  • केन्द्र एवं प्रदेश सरकार द्वारा महिला सशक्तीकरण के लिए अनेक योजनाएं संचालित
  • प्रधानमंत्री द्वारा महिलाओं और बालिकाओं के सशक्तीकरण व कल्याण के लिए ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ सहित अनेक योजनाएं लागू की गई हैं
  • राज्य सरकार द्वारा बालिकाओं द्वारा अद्भुत साहस का कार्य करने पर महारानी लक्ष्मीबाई के नाम पर विशेष सम्मान का प्राविधान
  • शौचालयों का निर्माण सिर्फ स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति जागरूकता कार्यक्रम नहीं, बल्कि यह नारी गरिमा का भी प्रतीक
  • महिलाओं एवं बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान एवं स्वावलम्बन के लिए पूरे प्रदेश में ‘मिशन शक्ति’ अभियान संचालित किया जा रहा है
  • नारी गरिमा की रक्षा करना, उन्हें सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल उपलब्ध कराना, समाज और सरकार दोनों की जिम्मेदारी
  • महिलाओं की सहायता के लिए प्रदेश की सभी 350 तहसीलों में महिला प्रकोष्ठ का गठन होगा
  • राज्य सरकार द्वारा पुलिस भर्ती में महिलाओं को 20 प्रतिशत आरक्षण दिया गया

(www.arya-tv.com)मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने जनपद झांसी में महारानी लक्ष्मीबाई के 192वें जन्म दिवस पर दैनिक जागरण समूह के तत्वावधान में आयोजित ‘दीपांजलि’ वेबिनार में अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने विदेशी हुकूमत के सामने नारी शक्ति का जिस रूप में प्रस्तुतीकरण किया, वह अविस्मरणीय है। वे दुनिया के सामने नारी गौरव का प्रतीक हैं। उनके शौर्य के सामने विदेशियों को घुटने टेकने पड़े। ‘मैं अपनी झांसी किसी को नहीं दूंगी’ का दृढ़संकल्प हम सबके लिए प्रेरणादायी है। उन्होंने भारत की स्वाधीनता बनाए रखने के लिए अपना बलिदान दिया। राष्ट्र के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाली वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई की पावन स्मृति को अक्षुण्ण बनाये रखने एवं उनके प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने के लिए ‘दीपांजलि’ कार्यक्रम का आयोजन अत्यन्त सराहनीय प्रयास है। इस अवसर पर उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर वेबिनार का शुभारम्भ किया तथा रानी लक्ष्मीबाई पर केन्द्रित नृत्य नाटिका का भी अवलोकन किया।

काशी में जन्मीं रानी लक्ष्मीबाई देशभक्ति का प्रतीक थीं। उन्होंने कहा कि काशी और झांसी का संवाद आज भी मौजूद है। यह कार्यक्रम भारत की इस वीरांगना के प्रति समर्पित है। उन्होंने कहा कि हमारे समाज में मौजूद सभी महिलाएं एवं पुरुष योग्यता से परिपूर्ण हैं। अवसर मिलने पर उनकी प्रतिभा उभर सकती है। महारानी लक्ष्मीबाई का साहस एवं दृढ़ता हम सभी को राष्ट्र सेवा की प्रेरणा प्रदान करती है।

कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी वे पीछे नहीं हटीं और उन्होंने ब्रिटिश फौज का डटकर मुकाबला किया। हमारे इतिहास में ऐसी अनेक महिलाओं का सन्दर्भ मिलता है, जिन्होंने अपने व्यक्तित्व और कृतित्व से उपलब्धियों के उच्चतम आयाम स्थापित किए हैं। वर्तमान में भी अनेक महिलाएं और बालिकाएं अपनी प्रतिभा, ज्ञान और कर्मठता से सफलता के नये उदाहरण प्रस्तुत कर रही हंै। अपने विशिष्ट कार्यों से यह महिलाएं और बालिकाएं समाज को राह दिखा रही हैं। भारतीय संस्कृति व परम्परा में मातृशक्ति के सशक्तीकरण के माध्यम से सम्पूर्ण चराचर जगत के कल्याण का भाव निहित है।

केन्द्र एवं प्रदेश सरकार द्वारा महिला सशक्तीकरण के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। महिलाओं की सुरक्षा तथा देश व प्रदेश के विकास में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करना राज्य सरकार की शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा महिलाओं और बालिकाओं के सशक्तीकरण व कल्याण के लिए ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ सहित अनेक योजनाएं लागू की गई हैं। ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ में महिला के नाम पर आवास, ‘प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना’ में महिला के नाम पर रसोई गैस कनेक्शन तथा ‘स्वच्छ भारत मिशन’ में महिला के लिए ‘इज्जत घर’ की व्यवस्था इसका उदाहरण हैं।

राज्य सरकार ने इन योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने के साथ ही, आवश्यकतानुसार अपनी योजनाएं भी प्रारम्भ की हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के लिए सभी बालिकाएं वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई का प्रतीक हैं। इसे ध्यान में रखकर सरकार ने विभिन्न कार्यक्रम प्रारम्भ किए हैं। राज्य सरकार द्वारा बालिकाओं द्वारा अद्भुत साहस का कार्य करने पर महारानी लक्ष्मीबाई के नाम पर विशेष सम्मान का प्राविधान किया गया है। इसी प्रकार उत्कृष्ट बालिका खिलाड़ियों को लक्ष्मीबाई पुरस्कार से प्रदेश सरकार सम्मानित करती है। केन्द्र सरकार द्वारा लागू किए गए स्वच्छ भारत मिशन के तहत देश में 10 करोड़ गरीबों को शौचालय (इज्जत घर) उपलब्ध कराए गए। इसके अन्तर्गत उत्तर प्रदेश में भी बड़ी संख्या में शौचालयों का निर्माण हुआ। शौचालयों का निर्माण सिर्फ स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति जागरूकता कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह नारी गरिमा का भी प्रतीक बना।

वर्ष 2017 में प्रदेश सरकार बनने के बाद स्नातक स्तर तक बालिकाओं की निःशुल्क शिक्षा कार्यक्रम को आगे बढ़ाया गया। बालिकाओं के स्वास्थ्य एवं शिक्षा के स्तर में वृद्धि करने तथा उनके भविष्य को उज्ज्वल बनाने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार द्वारा ‘मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना’ का संचालन किया जा रहा है। बालिका के जन्म लेने पर ‘मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना‘ के अन्तर्गत उसका रजिस्ट्रेशन कराये जाने पर 02 हजार रुपये की धनराशि दिये जाने की व्यवस्था है। बालिका के एक वर्ष का होने तथा सम्पूर्ण टीकाकरण होने पर 01 हजार रुपये प्रदान करने की व्यवस्था है। इसी प्रकार बालिका के प्रथम कक्षा में प्रवेश पर 02 हजार रुपये, छठी कक्षा में प्रवेश पर 02 हजार रुपये, नवीं कक्षा में प्रवेश पर 03 हजार रुपये तथा हाईस्कूल के पश्चात दो वर्ष से अधिक के डिप्लोमा अथवा 12वीं उत्तीर्ण करने के पश्चात स्नातक में प्रवेश पर 05 हजार रुपये दिये जाने की व्यवस्था की गयी है। यह योजना सभी श्रेणी के पात्र लाभार्थियों के लिए लागू की गयी है।

राज्य सरकार द्वारा सभी वर्गाें के निर्धन परिवारांे की कन्याओं के विवाह के लिए ‘मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना’ संचालित की जा रही है। इसके तहत लाभार्थी को 51 हजार रुपए की सहायता दी जाती है। इस योजना के तहत 01 वर्ष में 01 लाख से अधिक बालिकाओं का विवाह सम्पन्न कराया गया है। इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में जनप्रतिनिधियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है।

महिलाओं एवं बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान एवं स्वावलम्बन के लिए पूरे प्रदेश में ‘मिशन शक्ति’ अभियान संचालित किया जा रहा है। लगभग 59,000 ग्राम पंचायतों में बी0सी0 सखी की तैनाती की जा रही है, इससे प्रत्येक ग्राम पंचायत में एक महिला को बी0सी0 सखी के रूप में रोजगार मिलेगा। बी0सी0 सखी पंचायत भवन से कार्य संचालित करेंगी। इससे गांव के लोगों को बैंकिंग सम्बन्धी सुविधाएं प्राप्त होंगी। प्रदेश की लगभग 59,000 ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालय निर्मित हो रहे हैं। इन सामुदायिक शौचालयों में नियमित साफ-सफाई हेतु महिला स्वयं सहायता समूह में से किसी एक महिला का चयन कर उसे 6,000 रुपये मासिक मानदेय दिया जाएगा।

महिलाओं/बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलम्बन को ध्यान में रखते हुए ही ‘मिशन शक्ति’ कार्यक्रम लागू किया गया है। उन्होंने कहा कि कोई भी समाज नारी गरिमा के प्रतिकूल आचरण कर कभी गौरव की अनुभूति नहीं कर सकता है और न ही आगे बढ़ सकता है। नारी गरिमा की रक्षा करना, उन्हें सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल उपलब्ध कराना, समाज और सरकार दोनों की जिम्मेदारी है। इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए ‘मिशन शक्ति’ कार्यक्रम 03 चरणों में आगे बढ़ाया जा रहा है। प्रथम चरण में व्यापक जन जागरण, दूसरे चरण में ‘मिशन शक्ति’ आॅपरेशन तथा तीसरे चरण में महिलाओं के विरुद्ध आचरण करने वालों के खिलाफ समाज के सहयोग से कानूनी कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सहायता के लिए प्रदेश की सभी 350 तहसीलों में एक महिला प्रकोष्ठ का गठन होगा। तीसरे चरण में ही महिलाओं के स्वावलम्बन का व्यापक कार्यक्रम भी चलाया जाएगा। इसके अलावा, बैंकिंग करेस्पाॅण्डेण्ट सखी की सुविधा को भी हर ग्राम पंचायत के साथ जोड़ा जाएगा।

राज्य सरकार महिलाओं के सशक्तीकरण और उनके सम्मान की सुरक्षा के लिए कटिबद्ध है। उत्तर प्रदेश में 43 प्रतिशत महिला ग्राम प्रधान हैं, जो प्रदेश की महिलाओं की प्रगतिशील सोच को दर्शाता है। राज्य सरकार द्वारा पुलिस भर्ती में महिलाओं को 20 प्रतिशत आरक्षण दिया गया, जिसके फलस्वरूप आज बड़ी संख्या में महिला पुलिसकर्मी पुलिस बल में कार्यरत हैं और समाज में अपना सकारात्मक योगदान दे रही हैं।

वेबिनार के दौरान झांसी के सांसद अनुराग शर्मा ने भी प्रतिभाग किया। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव सूचना एवं एम0एस0एम0ई0 नवनीत सहगल, प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री एवं सूचना संजय प्रसाद, सूचना निदेशक शिशिर सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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