- निजी कॉलेजों के शिक्षकों-कर्मचारियों को मिली बड़ी सौगात
- कैशलेस चिकित्सा योजना में शामिल होने पर प्रदेशभर में खुशी की लहर
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने मान्यता प्राप्त निजी (स्व-वित्तपोषित) महाविद्यालयों के शिक्षकों एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के लिए एक ऐतिहासिक और सराहनीय निर्णय लेते हुए उन्हें ‘पंडित दीनदयाल उपाध्याय राज्य कर्मचारी कैशलेस चिकित्सा योजना’ के अंतर्गत शामिल करने की मंजूरी प्रदान कर दी है। इस फैसले के तहत अब प्रदेश के हजारों निजी कॉलेजों में कार्यरत शिक्षक एवं कर्मचारी ₹5 लाख तक का नि:शुल्क इलाज प्राप्त कर सकेंगे, जिससे उनके स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़ी लंबे समय से चली आ रही चिंताओं का समाधान होगा।
यह योजना आयुष्मान भारत की तर्ज पर लागू की जा रही है, जिससे लाभार्थियों को गंभीर बीमारियों के इलाज में आर्थिक सहायता मिलेगी और उन्हें महंगे इलाज के बोझ से राहत मिलेगी। इस निर्णय को निजी शिक्षा क्षेत्र के लिए एक बड़ा और सकारात्मक कदम माना जा रहा है, जो सरकार की संवेदनशीलता और कर्मचारियों के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
उत्तर प्रदेश प्राइवेट कॉलेज एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं आर्यकुल ग्रुप ऑफ कॉलेज के प्रबंध निदेशक डॉ. सशक्त सिंह ने इस निर्णय का जोरदार स्वागत करते हुए प्रदेश सरकार का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय न केवल शिक्षकों और कर्मचारियों के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, बल्कि उनके आत्मविश्वास और कार्यक्षमता को भी बढ़ाएगा।
डॉ. सशक्त सिंह ने कहा कि निजी महाविद्यालयों के शिक्षक एवं कर्मचारी लंबे समय से इस प्रकार की स्वास्थ्य सुविधा की अपेक्षा कर रहे थे। सरकार द्वारा उनकी इस मांग को स्वीकार करना अत्यंत सराहनीय है। उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत लोग समाज निर्माण की आधारशिला होते हैं और उनका स्वस्थ रहना अत्यंत आवश्यक है। ऐसे में यह योजना उनके जीवन में सुरक्षा और सम्मान दोनों प्रदान करेगी।
उन्होंने विशेष रूप से उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व और सकारात्मक सोच के कारण यह महत्वपूर्ण निर्णय संभव हो सका है। डॉ. सशक्त सिंह ने कहा कि सरकार का यह कदम यह साबित करता है कि वह निजी शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लाखों लोगों के कल्याण के प्रति गंभीर है।
उन्होंने आगे कहा कि इस योजना के लागू होने से निजी महाविद्यालयों में कार्यरत कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा और वे और अधिक समर्पण के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकेंगे। साथ ही इससे शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता में भी सकारात्मक सुधार देखने को मिलेगा।
डॉ. सशक्त सिंह ने उम्मीद जताई कि प्रदेश सरकार भविष्य में भी इसी तरह के जनहितकारी और दूरदर्शी निर्णय लेकर शिक्षा क्षेत्र को सशक्त बनाती रहेगी। उन्होंने कहा कि यह पहल निश्चित रूप से एक नई दिशा प्रदान करेगी और प्रदेश के निजी शिक्षा जगत को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
