पीलीभीत टाइगर रिजर्व के नए पर्यटन सत्र में पर्यटकों को बाघों की सुपर साइटिंग की संभावना ज्यादा है। जंगल की मशहूर बाघिन नैना और बराही फीमेल के कुनबे से 7 नए शावक अब पूरी तरह वयस्क हो चुके हैं। मां का आंचल छोड़कर जंगल में नई सीमाएं तलाश रहे हैं। इसलिए इस बात की पूरी संभावना है कि जंगल की सैर के दौरान सैलानियों को बाघों के दीदार बड़ी आसानी से हो सकते हैं।
पीलीभीत टाइगर रिजर्व में पर्यटन सत्र के दौरान पर्यटक बाघों के दीदार की हसरत लेकर पहुंचते हैं। इस बार उनका यह अनुभव पहले से कहीं अधिक रोमांचक हो सकता है। बाघों की बढ़ती आबादी को लेकर अंतरराष्ट्रीय अवार्ड जीत चुका पीलीभीत टाइगर रिजर्व एक बार फिर बाघों के बढ़ते कुनबे को लेकर चर्चा में है।
वन विशेषज्ञों के मुताबिक पीलीभीत टाइगर रिजर्व में दो बाघिन नैना और बराही मेल के वयस्क हो रहे सात नए बाघ अब जंगल में स्वतंत्र विचरण की तैयारी में हैं। जब युवा बाघ मां से अलग होते हैं, तो वे भोजन और अपने लिए सुरक्षित ठिकाने की खोज में जंगल के प्रमुख रास्तों, जलस्रोतों और ग्रासलैंड्स की ओर रुख करते हैं।
पीलीभीत टाइगर रिजर्व के पर्यटन क्षेत्र में सफारी रूटों के इर्द-गिर्द इन युवा बाघों की आवाजाही बढ़ने से पर्यटकों को जंगल में कदम रखते ही स्ट्राइप्ड बिग कैट के आमने-सामने होने का नजारा देखने को मिल सकता है।
पीटीआर प्रबंधन की चुनौती
टाइगर रिजर्व प्रशासन के सामने प्रबंधन की नई चुनौती भी खड़ी हो गई है। जंगल में पहले से स्थापित पुराने और ताकतवर बाघों जैसे एस-2, एस-3 के के बीच इन 7 नए बाघों को अपनी जगह बनानी होगी। ऐसे में टेरिटरी (विचरण क्षेत्र) को लेकर वर्चस्व की जंग भी छिड़ना स्वाभाविक है।
आपसी संघर्ष में बाघों के घायल होने या अप्रिय घटनाओं के खतरे को देखते हुए टाइगर रिजर्व प्रशासन पूरी सतर्कता बरत रहा है, ताकि पर्यटकों को सुरक्षित वातावरण में वन्यजीवों की इस प्राकृतिक जीवनशैली के दर्शन कराए जा सकें।
कितनी में उम्र में शुरू होता सफर
जंगल का नियम बहुत सीधा और कठोर है। वन्यजीव विशेषज्ञों के मुताबिक बाघिन अपने शावकों का संरक्षण केवल 20 से 24 माह की उम्र तक ही करती हैं। इसके बाद नर शावक लगभग 20 माह और मादा शावक करीब 24 माह की उम्र में अपनी स्वतंत्र राह चुन लेते हैं।
आगामी दो से तीन महीनों में इन सभी सात शावकों के अलग होने की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। जहां मादा शावक कई बार मां के इलाके के आसपास ही वर्चस्व बनाने की कोशिश करती हैं, वहीं नर शावक दूर निकलकर अपनी सल्तनत खड़ी करते हैं। सीमाओं के इस नए बंटवारे की वजह से जंगल के कुछ हिस्सों में बाघों की गतिविधियां कई गुना बढ़ गई हैं।
क्या बोले डिप्टी डायरेक्टर
पीटीआर के डिप्टी डायरेक्टर मनीष सिंह ने कहा कि सात शावक अब वयस्क होकर अपनी स्वतंत्र टेरिटरी बनाने की ओर बढ़ रहे हैं। शावकों की इस सक्रियता से सफारी के दौरान सैलानियों को आसानी से बाघों के दीदार होने की संभावना है। युवा बाघों के अलग होने की प्रक्रिया प्राकृतिक है, लेकिन इस दौरान टेरिटोरियल फाइट की संभावना को देखते हुए जंगल के संवेदनशील इलाकों में वन्यकर्मियों की गश्त व निगरानी बढ़ाई गई है।
