ट्रेडिंग बिजनेस में 100% रिटर्न का लालच देकर भोले-भाले युवाओं और छात्रों को जाल में फंसाने वाले एक बड़े सट्टेबाजी और ऑनलाइन ठगी सिंडिकेट का भंडाफोड़ हुआ है। बिलग्राम थाने में पीड़ितों की शिकायत पर लगभग 1.25 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है।
पुलिस के मुताबिक गैंग में आधा दर्जनों से अधिक युवक-युवतियां सक्रिय हैं। ठगी के इस पूरे जाल का मुख्य मास्टरमाइंड विजय शंकर शुक्ला निवासी बालागंज, लखनऊ बताया जा रहा है, जो कई फर्जी पहचान पत्र आधार/पैन और दर्जनों सिम कार्ड का इस्तेमाल कर सट्टेबाज़ी का सिंडिकेट चला रहा था। इस गैंग में उसकी महिला मित्र अंजना पाठक गोरखपुर समेत बिलग्राम के शुभ नारायण मिश्रा और निर्भय प्रताप सिंह भी शामिल हैं।
अस्पताल में हुई मुलाकात, फिर शुरू हुआ ठगी का खेल
पीड़ित शुभम दीक्षित ने बताया कि जुलाई 2025 में लखनऊ के अस्पताल में अपने नवजात बच्चे के इलाज के दौरान उनकी मुलाकात विजय शंकर से हुई थी। बच्चे की गंभीर हालत के कारण मानसिक रूप से परेशान शुभम को झांसे में लेकर आरोपी ने धीरे-धीरे 21.50 लाख रुपये ठग लिए। सिर्फ यही नहीं, आरोपी ने पढ़ाई करने वाले युवा छात्रों के दिमाग का ब्रेनवॉश कर उन्हें भारी कर्जे में डुबो दिया।
किसी से 66 लाख तो किसी से 22 लाख
मामले में आयुष दीक्षित से ₹66.50 लाख, उत्कर्ष मिश्रा, निशांत त्रिपाठी व हर्षित शुक्ला से ₹22 लाख, हिमांशू त्रिपाठी व विश्वनाथ प्रताप सिंह से ₹18.50 लाख तथा धीरज गुप्ता, प्रतीक सोनी व अन्य से लाखों रुपये की ठगी की गई है। पीड़ितों का आरोप है कि युवाओं और छात्रों को लगातार मुनाफे का लालच दिया गया। कुछ युवाओं पर कथित तौर पर इतना दबाव बनाया गया कि वे भारी कर्ज तक ले बैठे।
फर्जी कंपनी के नाम से भरोसा जीतने का आरोप
ठगों ने पीड़ितों को झांसा देने के लिए ‘GEPL CAPITAL INDIA LIMITED’ जैसी फर्जी कंपनियों के नाम का सहारा लिया। ठगी के पैसों से आरोपी लखनऊ के पॉश इलाकों सरयू एंक्लेव, गोल्फ सिटी व बुद्धेश्वर में किराए के लग्जरी फ्लैट्स और महंगी गाड़ियों के साथ ऐशो-आराम की जिंदगी जी रहे थे।
बैंक खाते, कॉल रिकॉर्ड और WhatsApp चैट खंगाल रही पुलिस
एंटी-फ्रॉड सेल की जांच रिपोर्ट के बाद हरदोई पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। उप-निरीक्षक श्री प्रकाश को मामले की जांच सौंपी गई है। पुलिस अब सिंडिकेट के बैंक खातों, कॉल रिकॉर्डिंग और व्हाट्सएप चैट्स की सघन जांच कर रही है।
