लखनऊ। International Day of Awareness of Food Loss and Waste के अवसर पर सरोजनीनगर के विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि अन्न की बर्बादी केवल भोजन का नुकसान नहीं है, बल्कि इसके साथ किसान की मेहनत और पानी, भूमि तथा ऊर्जा जैसे बहुमूल्य प्राकृतिक संसाधन भी व्यर्थ होते हैं। उन्होंने कहा कि खेत से बाजार और बाजार से थाली तक खाद्य पदार्थों को सुरक्षित पहुंचाना उत्पादन बढ़ाने जितना ही महत्वपूर्ण है। FAO के अनुसार, दुनिया में उत्पादित भोजन का करीब 13 प्रतिशत हिस्सा retail तक पहुंचने से पहले ही नष्ट हो जाता है, जबकि उपभोक्ताओं के लिए उपलब्ध भोजन का लगभग 19 प्रतिशत retail, food services और घरों में बर्बाद होता है। वैश्विक स्तर पर यह बर्बादी करीब 1.05 अरब टन प्रतिवर्ष है तथा Food Loss & Waste से वैश्विक greenhouse-gas emissions का लगभग 8 से 10 प्रतिशत जुड़ा है।
- बेहतर भंडारण और आपूर्ति व्यवस्था से घटेगा खाद्य नुकसान
डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि बेहतर भंडारण, cold-chain, परिवहन, food processing और value addition की मजबूत व्यवस्था से फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। आधुनिक खाद्य प्रसंस्करण और आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने वाली योजनाएं इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। उन्होंने कहा कि भोजन की बर्बादी कम करना केवल खाद्य सुरक्षा से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि किसान हित और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए भी जरूरी कदम है।
- हर घर से शुरू हो सकती है अन्न बचाने की मुहिम
उन्होंने कहा कि अन्न की बर्बादी रोकने की शुरुआत हर परिवार से हो सकती है। जरूरत के अनुसार ही भोजन लेना, खाद्य पदार्थों का उचित भंडारण करना, बचे हुए भोजन का उपयोग करना और जैविक कचरे से खाद तैयार करना जैसी छोटी-छोटी आदतें बड़ा बदलाव ला सकती हैं। डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि Net Zero Sarojininagar के व्यापक विजन में संसाधनों का जिम्मेदार उपयोग महत्वपूर्ण है। सौर ऊर्जा, स्वच्छ परिवहन और जल संरक्षण के साथ भोजन की बर्बादी रोकना भी टिकाऊ और Net Zero भविष्य की दिशा में आवश्यक कदम है। उन्होंने कहा कि अन्न का सम्मान किसान की मेहनत और प्रकृति के संसाधनों का सम्मान है। अन्न का हर दाना किसान, प्रकृति और आने वाली पीढ़ियों के लिए अनमोल है।
