कानपुर : नकली एंटी-रेबीज वैक्सीन की बिक्री में तीन पर एफआईआर

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कुत्ते के काटने के बाद लगाई जाने वाली एंटी-रेबीज वैक्सीन अबहेयरैब के संदिग्ध नकली बैच KE26005 की बिक्री के मामले में औषधि विभाग ने जांच के बाद तीन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई। जांच में कानपुर की न्यू आरजे एजेंसीज और एलिक्सिर क्योर के माध्यम से वैक्सीन की खरीद-बिक्री सामने आई है। औषधि विभाग की जांच में 1859 वायल की खरीद के सापेक्ष 1798 वायल की बिक्री का विवरण मिला, जबकि 61 वायल का संतोषजनक हिसाब नहीं दिया जा सका।

कलक्टरगंज थाने में जांच रिपोर्ट के आधार पर औषधि निरीक्षक ओमपाल सिंह ने 26 सितंबर को तहरीर दी, जिसमें तरनदीप सिंह, बलजीत कौर और राजिंदर सिंह के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। आरोप लगाया कि संदिग्ध नकली जीवनरक्षक दवा की खरीद-बिक्री से जनस्वास्थ्य को खतरा पैदा हुआ। दस्तावेज में औषधि व प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 की धारा 22(1)(डी) के तहत औषधि विभाग को प्राप्त अधिकारों के प्रयोग का भी उल्लेख है। पुलिस ने तहरीर के आधार पर रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू की है। औषधि निरीक्षकों ने 21, 23 और 25 सितंबर को संबंधित प्रतिष्ठानों की जांच की थी। कुछ स्थानों पर दुकानें बंद मिलीं और सील खोलकर जांच की। दस्तावेज के अनुसार न्यू आरजे एजेंसीज के संचालक पक्ष से वैक्सीन के स्टॉक और बिक्री का पूरा संतोषजनक विवरण नहीं मिल सका। जांच दस्तावेज में यह भी दर्ज है कि एलिक्सिर क्योर के प्रोपराइटर तरनदीप सिंह ने कुछ बिल अपने द्वारा जारी किए जाने से इनकार किया। जांच के दौरान मोबाइल बातचीत और चैट से संबंधित सामग्री का भी उल्लेख है।

अब पुलिस ने एफआईआर के आधार पर वैक्सीन की खरीद, बिक्री, शेष स्टॉक, बिलों और संबंधित लोगों की भूमिका की जांच शुरू कर दी है। वहीं औषधि विभाग के मुताबिक आगरा, हरदोई व उन्नाव जिलों में भी वैक्सीन की सप्लाई के संबंध में जानकारी मांगी गई है।

दिल्ली से शुरू हुई पड़ताल, कानपुर तक पहुंचा नेटवर्क

दस्तावेज के मुताबिक औषधि नियंत्रण विभाग, दिल्ली की जांच में वीएस फार्मास्यूटिकल्स, 1725 रामगली, भागीरथ पैलेस, दिल्ली से संबंधित अबहेयरैब को नकली/काउंटरफिट घोषित किए जाने की सूचना कानपुर औषधि विभाग को मिली। इसके बाद न्यू आरजे एजेंसीज से इसकी खरीद-बिक्री की जांच की गई। रिकॉर्ड में दर्ज है कि न्यू आरजे एजेंसीज ने एलिक्सिर क्योर से 18 सितंबर के बिल के माध्यम से 1859 वायल खरीदी थीं। इनमें से 1798 वायल विभिन्न फर्मों को बेचे जाने का विवरण मिला। जांच में महाव फार्मा, जय अंबे मेडिकल्स और अजय फार्मा समेत अन्य प्रतिष्ठानों से वैक्सीन वापस आने का भी उल्लेख है।