चीनी की बढ़ती मांग : त्योहारों से पहले मिठाई कारोबारियों की चिंता, पर्याप्त सप्लाई की मांग

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अमरोहा। चीनी की कीमतों में हुई तेज वृद्धि और बाजार में कृत्रिम किल्लत की आशंका के बीच व्यापारियों एवं उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने चीनी मिलों से पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने तथा सरकार से पारदर्शी निगरानी व्यवस्था लागू करने की मांग की है। गणेश चतुर्थी, दशहरा और दीपावली के त्योहारी सीजन के दौरान अगस्त से नवंबर तक चीनी की बढ़ने वाली मांग को देखते हुए पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मिठाई और कन्फेक्शनरी कारोबारियों ने बाजार पर निगाहें तेज कर दी हैं। इसके अलावा त्योहारी सीजन की मांग को पूरा करने के लिए चीनी मिलों को 15 अक्टूबर से नया पेराई सत्र शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।

15 अक्टूबर से नया पेराई सत्र शुरू

जानकारों के अनुसार घरेलू आपूर्ति मजबूत करने और कीमतों पर नियंत्रण के लिए केंद्र सरकार ने करीब एक दशक बाद 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है। सरकारी टीमें चीनी मिलों में उपलब्ध स्टॉक का भौतिक सत्यापन भी कर रही हैं। स्थानीय स्तर पर अमरोहा जिले की तीनों चीनी मिलों को अक्टूबर के तीसरे सप्ताह में चालू करने की तैयारी है।

क्या कहते है सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के अनुसार जुलाई में चीनी का औसत भाव 48.18 रुपये प्रति किलोग्राम था, जो अगस्त में बढ़कर 55.70 रुपये या इससे अधिक प्रति किलोग्राम हो गया। हालांकि हाल के दिनों में कीमतों में मामूली नरमी आई है, लेकिन दरें दो महीने पहले की तुलना में करीब 20 प्रतिशत ऊंची बनी हुई हैं।

क्या कहते है कारोबारी

पश्चिमी उत्तर प्रदेश देश के प्रमुख गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में शामिल है, जहां चीनी उद्योग, गन्ना किसान, थोक व्यापारी और मिठाई कारोबार एक-दूसरे से जुड़े हैं। हाल के महीनों में चीनी की कीमतों में हुई वृद्धि का असर पूरे आपूर्ति तंत्र पर पड़ा है।

सितंबर का चीनी कोटा अगस्त की तुलना में कम मिलने से व्यापारियों की चिंता बढ़ी है। अमरोहा जिले के गजरौला औद्योगिक क्षेत्र स्थित शंभु स्वीट्स एंड कन्फेक्शनरी के स्वामी एवं युवा व्यापारी नेता ईशान अग्रवाल ने चीनी मिलों से उचित दरों पर पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध कराने की मांग की है। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से मिलवार उत्पादन एवं बिक्री के आंकड़ों का भौतिक सत्यापन कराने की भी अपील की है।

अग्रवाल ने कहा कि सरकार को केवल त्योहारी सीजन में निगरानी करने के बजाय पूरे वर्ष चीनी मिलों के उत्पादन, स्टॉक और बिक्री के मिलवार आंकड़ों की समीक्षा करनी चाहिए, ताकि जमाखोरी पर समय रहते रोक लगाई जा सके।

पर्याप्त उत्पादन, पारदर्शी वितरण और उचित मूल्य नीति से ही त्योहारों के दौरान आम उपभोक्ताओं और मिठाई कारोबार को महंगाई के अतिरिक्त बोझ से बचाया जा सकता है। जमाखोरी और सट्टेबाजी पर अंकुश लगाने के लिए 15 सितंबर से 30 नवंबर तक डीलरों की स्टॉक सीमा 4,000 क्विंटल से घटाकर 2,000 क्विंटल कर दी गई है।