दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (IIC) में राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के मौके पर शुक्रवार को भारत की शानदार हथकरघा परंपरा को समर्पित कला-इतिहास प्रदर्शनी ‘साड़ी शस्त्र’ का उद्घाटन किया गया. केंद्रीय युवा मामले एवं खेल राज्य मंत्री रक्षा खडसे ने प्रदर्शनी का उद्घाटन किया. इस मौके पर इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस ऑफिसर्स वाइव्स एसोसिएशन (IASOWA) की अध्यक्ष हेमा सोमनाथन और इंडिया इंटरनेशनल सेंटर के निदेशक के. एन. श्रीवास्तव भी मौजूद रहे. यह प्रदर्शनी तीन दिन यानी 9 अगस्त तक चलेगी.‘शिखाज कारीगरी’ द्वारा आयोजित ‘साड़ी शस्त्र’ प्रदर्शनी साड़ी को सिर्फ कपड़े के एक टुकड़े के तौर पर नहीं, बल्कि अपनी कारीगरी के जरिए भारत के इतिहास, विरासत और सांस्कृतिक धरोहर की एक जीवंत पहचान के रूप में पेश करती है. यह प्रदर्शनी देश के अलग-अलग हिस्सों से हाथ से बुने, हाथ से पेंट किए गए, कढ़ाई वाले और GI-टैग प्राप्त कपड़ों को एक साथ लाती है.
‘जहां महिलाओं का सम्मान, वहां देवताओं का वास’
इस प्रदर्शनी की थीम संस्कृत के श्लोक ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः’ पर आधारित है यानी जहां महिलाओं का सम्मान होता है, वहां देवताओं का वास होता है और यह श्लोक ‘साड़ी शस्त्र’ की थीम से गहराई से जुड़ा है, जो उन अनगिनत महिलाओं का सम्मान करती हैं, जिनकी रचनात्मकता, हुनर और समर्पण ने भारत के समृद्ध हैंडलूम ट्रेडिशन में योगदान दिया है. साड़ी की हर परत रंग और बुनाई के जरिए गर्व और सशक्तिकरण की कहानियां बताती है और साथ ही इस शानदार शिल्प विरासत के पीछे के कारीगरों को सम्मान देती है.
‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ के विजन को मिलेगी मजबूती
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए युवा मामले और खेल राज्य मंत्री रक्षा खडसे ने ‘साड़ी शस्त्र’ की उस शानदार कोशिश की तारीफ की, जिसके तहत भारत की हथकरघा बुनाई की जीवंत परंपरा का जश्न मनाया जा रहा है. एक ऐसी परंपरा, जिसे बुनकरों और कारीगरों ने पीढ़ियों से आगे बढ़ाया है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत के शिल्पों और परंपराओं का जश्न मनाने से अलग-अलग क्षेत्रों की विविध सांस्कृतिक पहचानों को एक साथ लाकर ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ के विजन को मजबूत करने में मदद मिलती है. उन्होंने स्वदेशी को बढ़ावा देने और भारत की आत्मनिर्भर सांस्कृतिक परंपराओं को महत्व देने की जरूरत पर भी जोर दिया.
साड़ी से जुड़ी ताकत, हिम्मत और गर्व की कहानी
वहीं, महिलाओं और इंडियन आर्ट फॉर्म्स के बीच गहरे संबंध पर बात करते हुए हेमा सोमनाथन ने बताया कि कैसे ‘साड़ी शस्त्र’ हर साड़ी से जुड़ी ताकत, हिम्मत और गर्व की कहानियों को बताने की एक कोशिश है. इंडिया इंटरनेशनल सेंटर के डायरेक्टर के. एन. श्रीवास्तव ने ‘साड़ी शास्त्र’ के जरिए भारत की समृद्ध कला शैलियों को बचाने और उन्हें बढ़ावा देने के लिए ‘शिखाज कारीगरी’ की फाउंडर शिखा अजमेरा की कोशिशों की तारीफ की.
टेक्सटाइल हेरिटेज के लिए ग्लोबल डेस्टिनेशन
‘शिखाज कारीगरी’ की फाउंडर शिखा अजमेरा ने कहा, ‘शिखाज कारीगरी को कई मंचों पर अपना काम दिखाने का मौका मिला है, लेकिन इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में इस प्रदर्शनी को आयोजित करने का मौका हमारे लिए बहुत खास है. यह सिर्फ ब्रांड को दिखाने के बारे में नहीं है, बल्कि उन अनगिनत कलाकारों, बुनकरों और कारीगरों की कड़ी मेहनत, हुनर और कारीगरी को सम्मान देने के बारे में भी है, जिनके योगदान ने भारत को टेक्सटाइल हेरिटेज के लिए एक ग्लोबल डेस्टिनेशन बनाया है.
