- इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ चरित्र निर्माण पर दिया विशेष बल
लखनऊ। सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि विकसित भारत का सपना केवल आधुनिक सड़कें, पुल, डिजिटल व्यवस्था और मजबूत अर्थव्यवस्था से ही पूरा नहीं होगा, बल्कि इसके लिए राष्ट्रप्रथम सोच रखने वाले सक्षम, संस्कारवान और जिम्मेदार नागरिकों का निर्माण भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश आधुनिक आधारभूत संरचना, तकनीकी नवाचार, डिजिटल परिवर्तन और आर्थिक प्रगति के नए युग में प्रवेश कर चुका है। अब आवश्यकता इस बात की है कि नई पीढ़ी को ज्ञान, संस्कार, तकनीकी दक्षता और शारीरिक क्षमता से समृद्ध बनाया जाए, जिससे विकसित भारत की नींव और अधिक मजबूत हो सके।
- बच्चों में संस्कार और जिम्मेदारी विकसित करना पूरे समाज का दायित्व
डॉ. सिंह ने कहा कि ईमानदारी, अनुशासन, करुणा, राष्ट्रभक्ति, कर्तव्यबोध और दूसरों के प्रति सम्मान जैसे जीवन मूल्यों का विकास केवल परिवार या विद्यालय की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि पूरे समाज की साझी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि मूल्य आधारित शिक्षा किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी पूंजी होती है और आधुनिक विकास तभी सार्थक होता है, जब उसके साथ मजबूत चरित्र और सामाजिक जिम्मेदारी भी जुड़ी हो।
- इतिहास से सीख लेकर राष्ट्रीय एकता को बनाना होगा सबसे बड़ी ताकत
इतिहास का उल्लेख करते हुए डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि भारत जैसे विशाल देश पर सीमित संख्या में ब्रिटिश अधिकारियों और सैनिकों का लंबे समय तक शासन केवल उनकी शक्ति का परिणाम नहीं था, बल्कि हमारी आंतरिक कमजोरियों, सामाजिक विभाजन और राष्ट्रीय एकता के अभाव का भी प्रभाव था। उन्होंने कहा कि इतिहास हमें यह संदेश देता है कि राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए सामाजिक समरसता और एकजुटता को मजबूत करना ही भविष्य के भारत की सबसे बड़ी शक्ति बनेगा।
- ज्ञान, तकनीक, फिटनेस और डिजिटल कौशल से तैयार होगी भविष्य की पीढ़ी
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बच्चों और युवाओं को मूल्य, ज्ञान, तकनीक और फिटनेस का समन्वित प्रशिक्षण देना आवश्यक है। स्मार्ट कक्षाएं, डिजिटल पुस्तकालय, कृत्रिम बुद्धिमत्ता की जानकारी, डिजिटल साक्षरता, साइबर सुरक्षा और खेल गतिविधियां युवाओं को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने के प्रभावी माध्यम हैं। उनका कहना था कि आधुनिक तकनीक के साथ नैतिक मूल्यों का संतुलन ही भारत को विश्व नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ाएगा।
- सरोजनीनगर में डिजिटल सशक्तिकरण की पहल बन रही युवाओं की ताकत
डॉ. सिंह ने बताया कि सरोजनीनगर में संचालित 15 आरबीएस डिजिटल सशक्तिकरण केंद्र युवाओं को तकनीकी दक्षता और डिजिटल साक्षरता प्रदान कर रहे हैं। इन केंद्रों से अब तक 1,001 विद्यार्थी प्रशिक्षण पूरा कर चुके हैं, जबकि 481 विद्यार्थी वर्तमान में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने प्रतिभाशाली और परिश्रमी विद्यार्थियों को निरंतर प्रोत्साहित करने पर बल देते हुए कहा कि यही युवा आगे चलकर समाज और राष्ट्र के प्रेरणास्रोत बनेंगे।
- सरोजनीनगर स्पोर्ट्स लीग से बढ़ रहा युवाओं में आत्मविश्वास और अनुशासन
उन्होंने कहा कि खेल केवल प्रतियोगिता या पदक जीतने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, टीम भावना और आत्मविश्वास विकसित करने का सबसे प्रभावी साधन भी हैं। इसी उद्देश्य से संचालित सरोजनीनगर स्पोर्ट्स लीग युवाओं को स्वस्थ, नशामुक्त और सकारात्मक जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है। लीग के नौ संस्करणों में अब तक 10 हजार से अधिक युवा भाग ले चुके हैं, 1,500 से अधिक खेल सामग्री वितरित की जा चुकी है तथा 11 लाख रुपये से अधिक की पुरस्कार राशि प्रदान की गई है।
- “विकसित भारत के लिए राष्ट्रप्रथम नागरिक तैयार करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता”
डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि विकसित भारत का निर्माण आधुनिक आधारभूत संरचना, मजबूत अर्थव्यवस्था और तकनीकी प्रगति के साथ-साथ सशक्त मानव संसाधन और उच्च चरित्र वाले नागरिकों से ही संभव होगा। उन्होंने कहा कि यदि आज की पीढ़ी को संस्कार, ज्ञान, तकनीकी दक्षता और राष्ट्रप्रथम सोच के साथ तैयार किया गया, तो आने वाला भारत विश्व में विकास, सामाजिक समरसता और मानवीय मूल्यों का सर्वोत्तम उदाहरण बनेगा।
