रिलायंस निवेशकों को ₹3.5 लाख करोड़ का झटका! क्या Q1 नतीजे RIL के शेयर में दोबारा फूंकेंगे नई जान?

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इस साल रिलायंस इंडस्ट्रीज़ के निवेशकों को काफी नुकसान हुआ है. आंकड़ों को देखें तो मौजूदा साल में अब कंपनी के शेयरों में 15 फीसदी से ज्यादा की गिरावट देखने को मिल चुकी है. वहीं कंपनी का शेयर अपने पीक से करीब 20 फीसदी नीचे है. यही कारण है कि रिलायंस के निवेशकों को 3.5 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का नुकसान हो चुका है. अब सवाल ये है कि क्या पहली तिमाही के नतीजे रिलायंस के नुकसान को मुनाफे में बदल सकते हैं या नहीं.

रिलायंस इंडस्ट्रीज़ के निवेशकों के लिए 2026 का समय अब ​​तक मुश्किल भरा रहा है. इसका कारण भी है. मौजूदा साल में कंपनी के शेयरों में 15 फीसदी से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली है. जिसकी वजह से कंपनी के निवेशकों को लगभग 3.53 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हो चुका है. अब सबकी नजरें इस बात पर हैं कि क्या जून तिमाही के नतीजे निवेशकों का भरोसा वापस लाने में मदद कर सकते हैं.साल के ज्यादा समय RIL के शेयर दबाव में रहे हैं. इसकी वजहें हैं – रिटेल ग्रोथ में सुस्ती, ऑयल और गैस बिज़नेस में कमजोरी, रिफाइनिंग बिजनेस (जो कंपनी के लिए मोटी कमाई का ज़रिया है) पर दबाव और कंपनी के कंज्यूमर बिजनेस से कोई मजबूत ट्रिगर न मिलना. हाल ही में यह स्टॉक अपने 52-हफ्ते उच्चतम स्तर (5 जनवरी को 1,611.20 रुपये) से लगभग 20 फीसदी नीचे ट्रेड कर रहा था.

चिंता सिर्फ एक बिजनेस को लेकर नहीं है. रिलायंस का वैल्यूएशन अब चार बड़े बिज़नेस सेगमेंट के आधार पर किया जाता है. जिसमें ऑयल-टू-केमिकल्स, जियो, रिटेल और अपस्ट्रीम ऑयल और गैस शामिल हैं. हाल की तिमाहियों में, ये सभी सेगमेंट एक साथ अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाए हैं. पिछली कुछ तिमाहियों में कंपनी मुनाफे के अनुमानों पर खरी नहीं उतर पाई है.

रिटेल से होने वाली कमाई धीमी रही है और ऑयल-एंड-गैस सेगमेंट पर कम प्रोडक्शन और कीमतों में कमी का असर पड़ा है. त्योहारों के दौरान दी गई छूट, हाइपर-लोकल डिलीवरी स्टार्टअप्स में निवेश और नए लेबर कोड के असर से भी रिटेल मार्जिन प्रभावित हुआ है.

ऑयल-टू-केमिकल्स बिजनेस, जो लंबे समय से रिलायंस की कमाई का सबसे बड़ा जरिया रहा है, उसे भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है. अप्रैल में रॉयटर्स ब्रेकिंग व्यूज ने कहा था कि रिलायंस के शेयरों का प्रदर्शन बाजार के मुकाबले कमजोर रहा है. इसकी वजह ईरान के साथ तनाव का रिफाइनिंग पर असर, विंडफॉल टैक्स, ज्यादा फ्रेट कॉस्ट और चीन से मिलने वाली प्रतिस्पर्धा जैसी चिंताएं थीं.

क्या Q1 के नतीजे स्टॉक में तेजी लाएंगे?

इसका जवाब इस बात पर निर्भर करता है कि क्या रिलायंस का तिमाही प्रदर्शन सिर्फ ‘स्टेबल’ रहने से बेहतर होता है या नहीं. O2C (ऑयल-टू-केमिकल) का मजबूत प्रदर्शन इसमें मदद कर सकता है. जियो भी कमाई में सहारा दे सकता है. लेकिन स्टॉक की रेटिंग में बड़े बदलाव (री-रेटिंग) के लिए निवेशकों को बेहतर रिटेल मार्जिन, जियो IPO की साफ टाइमलाइन और इस बात का भरोसा चाहिए कि अपस्ट्रीम (तेल-गैस उत्पादन) में आई कमजोरी को संभाला जा सकता है.

इस माहौल में, पहली तिमाही के नतीजे अहम होंगे. ब्रोकरेज फर्मों को उम्मीद है कि रिलायंस का तिमाही प्रदर्शन स्थिर रहेगा, जिसमें O2C में रिकवरी और डिजिटल सेवाओं में लगातार बढ़ोतरी मुख्य भूमिका निभाएगी. रिटेल का प्रदर्शन सुस्त रह सकता है और कम प्रोडक्शन के कारण ऑयल और गैस सेगमेंट पर दबाव पड़ सकता है.

स्टॉक में कुछ हद तक निराशा की बात पहले ही शामिल हो चुकी है. अगर नतीजों में हर मोर्चे पर सुधार दिखता है और मैनेजमेंट का रुख भरोसेमंद रहता है, तो RIL के शेयर में राहत वाली तेजी (रिलीफ रैली) दिख सकती है. अगर ग्रोथ फिर से सिर्फ O2C पर टिकी रहती है और रिटेल सुस्त बना रहता है, तो बाजार तेजर का रुख़ अपनाने से पहले और इंतजार कर सकता है