पाकिस्तान में बैठे आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा की नई रणनीति का खुलासा हुआ है. भारत के मोस्ट वांटेड आतंकियों में शामिल राणा मोहम्मद अशफाक इन दिनों सिर्फ आतंकियों को हथियार चलाने की नहीं, बल्कि उन्हें शारीरिक और तकनीकी रूप से भी तैयार करने में जुटा हुआ है. सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान में लश्कर-ए-तैयबा की पोलिटिकल विंग पाकिस्तान मरकजी मुस्लिम लीग के बैनर तले कई शहरों में युवाओं के लिए अलग-अलग तरह के जेहादी ट्रेनिंग कैंप चलाए जा रहे हैं. इन कैंपों में युवाओं का सिर्फ धार्मिक या वैचारिक तौर पर ब्रेन वाश नहीं किया जा रहा बल्कि फिजिकल और टेक्निकल ट्रेनिंग भी दी जा रही है.
तस्वीरों के मुताबिक, भारत का मोस्ट वांटेड आतंकी राणा मोहम्मद अशफाक खुद स्विमिंग पूल में उतरकर तैराकी कर रहा है. लेकिन ये सिर्फ उसकी व्यक्तिगत ट्रेनिंग नहीं है. दावा है कि उसके नेतृत्व में युवाओं को तैराकी सिखाई जा रही है ताकि वे पानी के रास्ते आने-जाने, कठिन परिस्थितियों से निकलने और विशेष अभियानों के लिए तैयार हो सकें.
युवाओं को दे रहा है जूडो, कराटे की ट्रेनिंग
यही नहीं, पाकिस्तान के कई शहरों में युवाओं को जूडो, कराटे, ताइक्वांडो, कुश्ती और शारीरिक व्यायाम की ट्रेनिंग भी दी जा रही है. वीडियो में युवा मार्शल आर्ट की तकनीक सीखते, मुकाबले की प्रैक्टिस करते और कठिन शारीरिक अभ्यास करते दिखाई देते हैं. इस पूरी ट्रेनिंग का मकसद ऐसे प्रशिक्षित युवाओं की एक टीम तैयार करना बताया जा रहा है जो हर तरह की चुनौती का सामना कर सके.
सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि अब लश्कर की नजर सिर्फ शारीरिक ताकत पर नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीक पर भी है. जानकारी के मुताबिक, महिला सदस्यों को स्किल डेवलपमेंट के नाम पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की ट्रेनिंग दी जा रही है. इसके लिए पाकिस्तान मरकजी मुस्लिम लीग अलग-अलग शहरों में विशेष ट्रेनिंग कैंप चला रही है.
AI से जुड़ी जानकारी पर भी कर रहा है काम
इन कार्यक्रमों में सबसे ज्यादा भागीदारी महिलाओं की है. उन्हें नई तकनीकों, डिजिटल टूल्स और AI से जुड़ी जानकारी दी जा रही है. एक वीडियो में राणा मोहम्मद अशफाक खुद ये कहते हुए दिखाई देता है कि “दुश्मन तकनीक के मामले में काफी आगे है, इसलिए मुजाहिदों को भी आधुनिक तकनीक सीखनी होगी.”
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इन दावों की पुष्टि होती है, तो ये संकेत है कि आतंकी संगठन अब पारंपरिक आतंकवाद के साथ-साथ तकनीकी, साइबर और सूचना युद्ध की दिशा में भी अपनी तैयारी बढ़ा रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक, इन ट्रेनिंग सेंटरों में युवाओं का मनोबल बढ़ाने के लिए लश्कर के बड़े आतंकी भी लगातार पहुंच रहे हैं और उन्हें संगठन से जुड़ने तथा कथित “मिशन” के लिए प्रेरित कर रहे हैं. सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि इस तरह की ट्रेनिंग का इस्तेमाल भविष्य में पानी के रास्ते घुसपैठ, साइबर हमलों, सोशल मीडिया पर प्रोपेगेंडा फैलाने और तकनीक आधारित गतिविधियों में किया जा सकता है.
हालांकि, इन वीडियो और दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की जा सकी है. लेकिन, सुरक्षा एजेंसियां पाकिस्तान में चल रही ऐसी गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और इसे संभावित सुरक्षा चुनौती के तौर पर देख रही हैं.
कुल मिलाकर, पाकिस्तान में आतंकी संगठन अब केवल बंदूक और बारूद के सहारे नहीं, बल्कि फिजिकल ट्रेनिंग, आधुनिक तकनीक और AI जैसे नए माध्यमों का इस्तेमाल कर अपने नेटवर्क को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं. ऐसे में भारत की सुरक्षा एजेंसियां भी इस बदलती रणनीति को लेकर पूरी तरह सतर्क हैं.
