फोन कॉल नहीं उठाने वाले बिजली विभाग के अधिकारियों के खिलाफ मुख्य अभियंता ज्ञान प्रकाश के निर्देश पर बड़ी कार्रवाई की गई। अधीक्षण अभियंता ने लापरवाही के मामले में दो अवर अभियंताओं को ‘परिनिंदा प्रविष्टि’ देते हुए अन्य दो अवर अभियंताओं को चेतावनी पत्र जारी किया। इससे पहले बिजली विभाग के अधिकारियों की लापरवाही की गूंज लखनऊ तक पहुंची थी। वन मंत्री डॉ. अरुण कुमार ने न केवल अधिकारियों के साथ बैठक में यह मुद्दा उठाया था, बल्कि ऊर्जा मंत्री को पत्र भी लिखा था।
इन चार अवर अभियंताओं पर गिरी गाज
दरअसल, शनिवार को अधीक्षण अभियंता (शहरी) धर्मेंद्र सिंह ने तत्कालीन अवर अभियंता (सिक्स) मंजीत सिंह और तत्कालीन अवर अभियंता (थर्ड) चंद्रमा सिंह को ‘परिनिंदा प्रविष्टि’ दी। वहीं, 11 केवी एवं एलटी वर्टिकल के तत्कालीन अवर अभियंता साबिर खान और कृष्णकांत को चेतावनी पत्र जारी किया गया। इस कार्रवाई से बिजली विभाग के अधिकारियों में हड़कंप मच गया।
मांगा था स्पष्टीकरण, नहीं दिया जवाब तो गिरी गाज
बता दें कि जिन अवर अभियंताओं को परिनिंदा प्रविष्टि और चेतावनी पत्र जारी किया गया है, शासन तक मामला पहुंचने के बाद उनका पहले ही तबादला कर दिया गया था। बाद में इन अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया, लेकिन तय समय सीमा के भीतर और कई अवसर दिए जाने के बावजूद जब जवाब नहीं मिला तो मुख्य अभियंता के निर्देश पर यह कार्रवाई की गई।
वन मंत्री ने बैठक में लगाई थी फटकार
23 मई को सर्किट हाउस में वन मंत्री डॉ. अरुण कुमार ने बिजली विभाग के अधिकारियों की जमकर क्लास लगाई थी। बैठक में अन्य विधायक और पार्षद भी मौजूद थे। आरोप लगाया गया था कि बिजली विभाग के अधिकारी आम लोगों और जनप्रतिनिधियों के फोन नहीं उठाते हैं। बैठक के दौरान इस पर कड़ा ऐतराज जताते हुए फोन नहीं उठाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई थी।
अनुशासनहीनता नहीं होगी स्वीकार
अधीक्षण अभियंता धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि बिजली उपभोक्ताओं की समस्याओं के प्रति लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि समयबद्ध निस्तारण न करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। खास तौर पर जनप्रतिनिधियों और आम लोगों के फोन नहीं उठाना सरकारी आदेशों की अवहेलना और अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है, जिसके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।
