वॉशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि ईरान इस समय ‘गंभीर संकट’ की स्थिति में है और वह चाहता है कि अमेरिका जल्द से जल्द होर्मुज जलडमरूमध्य को खोल दे। ट्रंप ने यह बात अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कही, हालांकि यह साफ नहीं हो पाया है कि ईरान ने यह संदेश अमेरिका तक कैसे पहुंचाया। वहीं, इस दावे पर ईरान की ओर से भी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा कि ईरान चाहता है कि अमेरिका जल्द से जल्द होर्मुज जलडमरूमध्य को खोल दे, ताकि वह अपने नेतृत्व से जुड़ी समस्याओं को सुलझा सके।
ट्रंप के दावे पर उठ रहे हैं सवाल
ट्रंप ने यह भी कहा कि उन्हें भरोसा है कि ईरान अपनी आंतरिक मतभेदों को सुलझाने में सक्षम होगा। हालांकि, इस दावे को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि व्हाइट हाउस ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि यह संदेश ईरान की ओर से किसने दिया, अमेरिका में किसे मिला और यह बातचीत सीधे हुई या किसी मध्यस्थ के जरिए। ट्रंप ने अपने पोस्ट में लिखा, ‘ईरान ने हमें बताया है कि वह ‘गंभीर संकट’ में है और चाहता है कि हम जल्द से जल्द होर्मुज स्ट्रेट को खोल दें।’ ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है अहम?
‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है। ऐसे में इस जलमार्ग का बंद होना या बाधित होना पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति और तेल कीमतों पर सीधा असर डालता है। इससे पहले सोमवार को ट्रंप ने अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के साथ बैठक की थी, जिसमें ईरान के ताजा प्रस्ताव पर चर्चा की गई। यह प्रस्ताव होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने से जुड़ा बताया जा रहा है। व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलिन लेविट ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि इस मुद्दे पर चर्चा हुई है, लेकिन वह अभी बैठक के नतीजों पर कुछ भी कहने से बचना चाहती हैं।
ईरान के नेतृत्व में हैं आपसी मतभेद?
वहीं, अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा है कि ईरान अमेरिका के साथ समझौता करने को लेकर ‘गंभीर’ तो है, लेकिन वह समय भी लेना चाहता है। उन्होंने कहा, ‘ईरान अपनी मौजूदा स्थिति से बाहर निकलना चाहता है, लेकिन वहां के अलग-अलग गुटों के बीच मतभेद के कारण बातचीत सीमित हो रही है।’ रुबियो ने यह भी संकेत दिया कि ईरान के नेतृत्व में आपसी मतभेद शांति वार्ता को प्रभावित कर रहे हैं। वहीं, अमेरिकी प्रशासन को यह भी लगता है कि ईरान के बंदरगाहों पर जारी नौसैनिक दबाव यानी कि घेराबंदी का असर पड़ रहा है।
