गन्ना के घटते रकबे को लेकर चिंता, किया जा रहा मंथन, सहकारी गन्ना समिति की बैठक में उठ चुका मुद्दा

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जिले में गन्ने का रकबा घट रहा है। इसको लेकर इससे जुड़े लोगों में चिंता है। मंथन शुरू हो गया है। किसानों की समस्याओं के साथ घटते रकबे को लेकर सहकारी गन्ना समिति मसौधा के सामान्य सभा की बैठक में चिंता जताई गई थी।

गन्ने की फसल कैश क्रॉप मानी जाती है। इससे किसानों को सीधे पैसा मिलता है। लेकिन पिछले लगभग तीन साल से गन्ने की फसल का रकबा घटने की बात बताई जा रही है, जबकि कहा यह जाता है कि गन्ना मिले भी गन्ना किसानों को तकनीक के साथ खाद बीज का सहयोग करती हैं, लेकिन गन्ने का रकबा फिर भी गिर रहा है। यह बड़ी चिंता का विषय माना जा रहा है। अब इस पर गन्ना मिलों से विभाग तक में मंथन शुरू किया गया है। गन्ना रकबा कैसे बढ़ेगा इस पर चर्चा की जा रही है।

कई जानकारों का कहना है कि शहरीकरण और प्लाटिंग कौ दौर तेज है। रियल एस्टेट के कारोबारी सक्रिय है। अयोध्या शहर के साथ कस्बों का शहरीकरण बढ़ा है। इसलिए लोगों के पास जमीन घट रही है। वह सीधे भोजन से जुड़ी फसलों को प्राथमिकता दे रहे हैं। इसमें गन्ने के क्षेत्र भी शामिल हैं। खास तौर मसौधा और शहर से सटे इलाके इसमें शामिल हैं। इसकी पूर्ति कहां से की जाएगी। मंथन का विषय खासतौर से यही है। फिलहाल गन्ने के नए क्षेत्र भी अगले कुछ सालों में सामने आ सकते हैं। गन्ना विभाग के लोग औपचारिक रूप से तो कुछ नहीं बोलते लेकिन बताते हैं कि यह गंभीर विषय है। इस पर मंथन चल रहा है।