आंधी-बारिश से गेहूं की 20 प्रतिशत फसल तबाह, बहेड़ी, फरीदपुर और आंवला में नुकसान ज्यादा

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जिले में कुदरत के कहर ने अन्नदाता की कमर तोड़ दी है। मार्च के अंतिम सप्ताह और हाल ही के दिनों में आई भीषण आंधी और बेमौसम बारिश ने जिले के सैकड़ों किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। फसल बीमा कंपनी की शुरुआती जांच और सर्वे के मुताबिक, बहेड़ी, फरीदपुर और आंवला तहसीलों में कुदरत का सबसे ज्यादा प्रकोप देखा गया है।जिले में लगभग पौने दो लाख हेक्टेयर भूमि पर गेहूं की खेती होती है, जिसमें से प्राथमिक अनुमानों के अनुसार करीब 20 फीसदी फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका है। कहा जा रहा है कि यह तबाही न केवल किसानों के लिए व्यक्तिगत क्षति है, बल्कि इससे गेहूं खरीद प्रक्रिया और सरकारी लक्ष्यों पर भी गहरा असर पड़ना तय है। बारिश और आंधी का सबसे ज्यादा असर उन किसानों पर पड़ा है, जिनकी गेहूं की फसल कटकर खेतों में ही गट्ठरों के रूप में रखी थी।

खेतों में पानी भरने के कारण फसल सड़ने की कगार पर है, जिससे दाना काला पड़ने और चमक खोने का डर है। इसके अलावा, तेज हवा ने खेतों में खड़ी पकी फसल को भी बिछा दिया है। आंकड़ों के अनुसार, अब तक 400 से अधिक किसानों ने बीमा कंपनी के टोल फ्री नंबर पर अपनी शिकायत दर्ज कराई है। इनमें सर्वाधिक नुकसान बहेड़ी के 75 नवाबगंज के 52 और फरीदपुर के 29 किसानों को हुआ है। बीमा कंपनी ने इन प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान के आकलन के साथ मुआवजे की रिपोर्ट तैयार करनी शुरू कर दी है।

बहरहाल बड़ी संख्या में ऐसे किसान भी हैं जिन्होंने फसल बीमा नहीं कराया था। डिप्टी आरएमओ कमलेश पांडेय का कहना है कि यदि 20 प्रतिशत फसल नुकसान का अनुमान सही साबित होता है, तो मंडियों में गेहूं की आवक कम होगी, जिससे बाजार भाव और सरकारी खरीद केंद्रों की व्यवस्था प्रभावित होना निश्चित है।