सरकार और प्रशासन को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से एक कदम आगे रहना होगा। आपदा प्रबंधन में एआई का प्रभावी उपयोग किया जा सकता है। साथ ही इसके लिए स्वदेशी मॉडल विकसित करने की आवश्यकता है। यह बात लखनऊ विश्वविद्यालय के लोक प्रशासन विभाग की अटल सुशासन पीठ में आयोजित कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने कही। महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय, बीकानेर के कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित ने कहा कि एआई का प्रयोग नीतिगत मूल्यांकन, भ्रष्टाचार निवारण और लैंगिक विविधता जैसे क्षेत्रों में किया जा सकता है। साथ ही विशेषज्ञों ने एआई से होने वाले संभावित नुकसान पर भी चर्चा की।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं सुशासन के नए आयाम विषय पर आयोजित संगोष्ठी में लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जय प्रकाश सैनी ने कहा कि एआई के प्रयोग में इसके नकारात्मक पक्षों से बचना होगा। उन्होंने कहा कि सुशासन सुनिश्चित करने में शोधार्थियों की जिम्मेदारी अधिक है। पूर्व कुलपति प्रो. मनुका खन्ना ने एआई के संभावित खतरों के प्रति आगाह किया। कार्यक्रम में भारतीय लोक प्रशासन संस्थान की प्रो. चारु मल्होत्रा ने एआई के स्वदेशीकरण पर बल दिया।
सुशासन में एआई की भूमिका अहम
प्रदेश के सूचना प्रौद्योगिकी व इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के सचिव अनुराग यादव ने कहा कि एआई को प्रभावी ढंग से लागू कर सुशासन की अवधारणा को साकार किया जा सकता है। उन्होंने स्टार्टअप और उद्यमशीलता को बढ़ावा देने में भी एआई की महत्वपूर्ण भूमिका बताई।
प्रॉम्प्ट तैयार करने में एआई का करें प्रयोग
वाणिज्य विभाग की भाऊराव देवरस शोध पीठ द्वारा ग्लोबल इकोनॉमी और एआई विषय पर कार्यशाला भी आयोजित की गई। इसमें कुलपति ने कहा कि डिजिटल साक्षरता आज के समय की आवश्यकता है। उन्होंने प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग की अवधारणा का उल्लेख करते हुए बताया कि सही प्रकार से प्रॉम्प्ट तैयार करने से एआई टूल्स का अधिक प्रभावी उपयोग किया जा सकता है।
