एतिहासिक आसिफी मस्जिद में अलविदा की नमाज के बाद ईरान पर थोपी गई जंग और शियों के रहबर आयतुल्लाह अली खामेनेई को शहीद किये जाने पर अमरीका और इजराइल के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन को दिए संबोधन में मौलाना कल्बे जवाद ने कहा कि ईरान ने सर नहीं झुकाया क्योंकि वह कर्बला का मानने वाला है। खामेनेई ने दुनिया को सन्देश दिया कि कर्बला वाले सर कटा देते हैं लेकिन उसे झुकाते नहीं हैं।
मौलाना ने कहा कि जो हालात हैं उससे यह साफ़ है कि यह आख़री विरोध प्रदर्शन है। अगली ईद पर बैतुल मुकद्दस पर यौमे आजादी मनाई जायेगी। उन्होंने कहा कि इस जंग में जीत सच्चाई की होगी। उन्होंने इस बात पर खुशी जताई कि ईरान ने भारत को तेल देने की इजाजत दी। ईरान ने ऐसे हालात बना दिए कि ट्रंप खुशामद कर रहा है कि जंग खत्म हो जाए।
मौलाना अली अब्बास खान ने कहा कि इंसानियत के लीडर को शहीद करने के बाद अमरीका और इजराइल ने सोचा था कि इससे ईरान की आवाज कमजोर पड़ जायेगी लेकिन उन्हें यह पता नहीं था कि शहीद की आवाज और भी ताकतवर हो जाती है।
उन्होंने कहा कि हमें कामयाब कौमों से सीखने की जरूरत है। 45 साल पहले जो ईरान छोटा सा हथियार भी नहीं बना सकता था उससे सुपर पॉवर सीज फायर की प्रार्थना कर रहा है।
मौलाना शाहिद आलम ने कहा कि आज यौमे कुद्स है। यह दिन बेसहारों के साथ खड़ा होने का दिन है। आयतुल्लाह खामेनेई ने अमरीका के चेहरे से नकाब हटा दी है। उन्होंने कहा कि इस जंग से जालिमों की शक्लें सामने आ गई हैं। आयतुल्लाह खामेनेई हमदर्दी का दूसरा नाम हैं।इस मौके पर मौजूद हजारों नमाजियों ने इजराइल, अमरीका और सऊदी अरब के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। आयतुल्लाह खामेनेई और 165 मासूम बच्चों को निशाना बनाकर कत्ल करने वालों के लिए बद्दुआ की।
