- युवा ही राष्ट्र निर्माण के आधार स्तंभ हैं : आचार्य राजकुमार मित्तल
लखनऊ। बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में कार्यक्रम अधिकारी डॉ. तरुणा के कुशल नेतृत्व में आयोजित राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) इकाई–2 के सात दिवसीय विशेष शिविर का भव्य समापन कुलपति आचार्य राजकुमार मित्तल की अध्यक्षता में संपन्न हुआ।

कार्यक्रम में लखनऊ विश्वविद्यालय के ख्यातिलब्ध अर्थशास्त्री प्रो. एम. के. अग्रवाल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। अपने उद्बोधन में प्रो. अग्रवाल ने सात दिवसीय विशेष शिविर को सफलतापूर्वक पूर्ण करने के लिए सभी स्वयंसेविकाओं को बधाई दी। उन्होंने कहा कि एनएसएस स्वयंसेवकों का अनुशासन, समर्पण और सेवा-भाव समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने की अपार क्षमता रखता है। प्रत्येक व्यक्ति में समाज के प्रति सेवा-भावना होना आवश्यक है, क्योंकि हम सभी समाज से गहराई से जुड़े हुए हैं। यही राष्ट्रीय सेवा योजना की मूल भावना है।
कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि प्रो. प्रीति चौधरी ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना का लक्ष्य गीत मात्र एक गीत नहीं, बल्कि युवाओं में साहस, संकल्प और प्रेरणा का संचार करने वाला सशक्त माध्यम है। उन्होंने पर्यावरण की गंभीर होती समस्या पर चिंता व्यक्त करते हुए युवाओं से आह्वान किया कि वे आगे आकर पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाएँ और इस वसुंधरा को सुंदर एवं सुरक्षित बनाएँ।
कार्यक्रम अधिकारी डॉ. तरुणा ने सात दिवसीय विशेष शिविर की विस्तृत आख्या प्रस्तुत करते हुए बताया कि यह शिविर सेवा, समर्पण और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को केंद्र में रखकर आयोजित किया गया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना छात्राओं को पुस्तकीय ज्ञान से आगे बढ़कर जीवन मूल्यों, सामाजिक संवेदनशीलता और नागरिक उत्तरदायित्व का बोध कराती है। इस विशेष शिविर के माध्यम से स्वयंसेविकाओं ने समाज के प्रति अपने कर्तव्यों को व्यवहारिक रूप में समझा। शिविर के दौरान पर्यावरण संरक्षण, राष्ट्रप्रेम और नैतिक मूल्यों के प्रति जागरूकता विकसित हुई। समग्र रूप से यह शिविर सेवा-भावना, अनुशासन और नेतृत्व क्षमता के विकास में पूर्णतः सफल रहा तथा विश्वविद्यालय और समाज के बीच एक सशक्त सेतु के रूप में स्थापित हुआ।
- सामाजिक उत्तरदायित्व के संस्कार विकसित करने का सशक्त माध्यम
अपने अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति आचार्य राजकुमार मित्तल ने सात दिनों में स्वयंसेविकाओं द्वारा किए गए कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि एनएसएस के स्वयंसेवक विश्वविद्यालयों के गौरव एवं राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य के आधार स्तंभ हैं। एनएसएस केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि युवाओं में सेवा, अनुशासन, नेतृत्व और सामाजिक उत्तरदायित्व के संस्कार विकसित करने का सशक्त माध्यम है। शिक्षा के साथ सेवा का भाव युवाओं को समाज और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायी नागरिक बनाता है।

उन्होंने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि समाज की समस्याओं को केवल देखना ही नहीं, बल्कि उन पर गहन चिंतन कर समाधान के लिए सक्रिय प्रयास करना भी हमारी जिम्मेदारी है। कुलपति ने उद्यमशील सोच (Entrepreneurship) अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि आज का भारत नौकरी चाहने वालों से अधिक नौकरी देने वाले युवाओं की अपेक्षा करता है। एनएसएस के माध्यम से विकसित अनुशासन, टीम भावना और नेतृत्व क्षमता युवाओं को सफल उद्यमी बनने की दिशा में प्रेरित कर सकती है। समाज की समस्याओं को निकट से देखने से ही सामाजिक उद्यमिता (Social Entrepreneurship) की चेतना विकसित होती है, जो स्वावलंबी भारत की नींव बनती है।
उन्होंने स्वदेशी की अवधारणा पर बल देते हुए कहा कि आत्मनिर्भर भारत की नींव स्वदेशी सोच में निहित है। स्थानीय संसाधनों, उत्पादों और ज्ञान के उपयोग से ही सशक्त और टिकाऊ विकास संभव है। साथ ही उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और मानव–AI इंटरफेस पर प्रकाश डालते हुए कहा कि AI मानव का विकल्प नहीं है। यदि AI आधारित नवाचारों को सेवा, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण विकास से जोड़ा जाए, तो यह समाज के अंतिम व्यक्ति तक सकारात्मक परिवर्तन पहुँचा सकता है।
आचार्य मित्तल ने भारतीय ज्ञान परंपरा (Indian Knowledge System) को आत्मसात करने की आवश्यकता पर विशेष जोर देते हुए कहा कि हमारी प्राचीन ज्ञान परंपरा—चाहे वह शिक्षा हो, पर्यावरण संरक्षण हो, सामाजिक समरसता हो या जीवन मूल्य—आज भी उतनी ही प्रासंगिक है। भारतीय ज्ञान परंपरा में निहित सेवा, त्याग, समन्वय, सहअस्तित्व और ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना ही भारत को वैश्विक स्तर पर विशिष्ट पहचान देती है। यदि युवा आधुनिक ज्ञान के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा को जोड़कर आगे बढ़ें, तो भारत स्वतः वैश्विक नेतृत्व की भूमिका में स्थापित होगा।
उन्होंने कहा कि ‘विकसित भारत’ का स्वप्न युवाओं की ऊर्जा, नैतिकता, नवाचार और सेवा-भाव से ही साकार होगा। एनएसएस के स्वयंसेवक इस परिवर्तन के अग्रदूत हैं, जो गांव, समाज और राष्ट्र को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य कर रहे हैं।
कार्यक्रम के अंत में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली स्वयंसेविकाओं को प्रमाण पत्र प्रदान कर अतिथियों द्वारा सम्मानित किया गया। इससे पूर्व माननीय कुलपति एवं अन्य अतिथिगणों ने स्वयंसेविकाओं द्वारा आयोजित वृक्षारोपण कार्यक्रम में सहभागिता की। कार्यक्रम का समापन एनएसएस समन्वयक डॉ. पवन चौरसिया द्वारा सभी अतिथियों, शिक्षकों एवं स्वयंसेविकाओं के प्रति आभार ज्ञापन के साथ हुआ।
