हर वर्ष मई-जून की छुट्टियों में रामपुर में लगने वाली नुमाइश आसपास के जिलों में काफी मशहूर थी, लेकिन पिछले दो साल से नुमाइश नहीं लग पाई है। लोगों का कहना है कि नवाबों की नुमाइश को दो साल से ””ग्रहण”” लग गया है। नवाब हामिद अली खां ने कृषि, हस्तशिल्प और औद्योगिक उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए 1899 में पनवड़िया के निकट मैदान में नुमाइश की शुरुआत कराई थी। नुमाइश प्रसिद्ध होती गई, जिसके बाद नवाब रजा अली खां ने 1935 में नुमाइश ग्राउंड में बाकायदा पक्की दुकानों का निर्माण करा दिया।
वर्ष 2024 से रामपुर नुमाइश नहीं लगी है। कला संस्कृति, कृषि, हस्तशिल्प और औद्योगिक उत्पादों के कारोबार को बढ़ा देने के लिए रामपुर नुमाइश का आगाज नवाब हामिद अली खां ने कराया था। नुमाइश की प्रसिद्धि धीरे-धीरे बढ़ती गई। नुमाइश में मेरठ, मुरादाबाद, संभल, बरेली, भदोही, लखनऊ समेत उत्तराखंड से कारोबारी दुकानें सजाने लगे। मेरठ की कैंची, मुरादाबाद के पीतल के बर्तन और सजावटी सामान, संभल के सींग के उत्पाद, बरेली का मांझा, सुरमा, भदोही की कालीन, लखनऊ के चिकन के कुर्ते और सूट के अलावा खिलौनों, बिसातखाने और दरी चांदनियों के अलावा मिट्टी चीनी के बर्तनों की दुकानें सजती थीं।
लोगों के मनोरंजन के लिए सर्कस, डांस पार्टी लगती थीं। जादूगर अपना जादू दिखाकर लोगों को दांतों तले उंगलियां दबाने को मजबूर कर देते थे। नुमाइश खत्म होने से पहले नवाब रजा अली खां नुमाइश में पहुंचते थे और दुकानदारों का बचा हुआ तमाम सामान खरीद लिया करते थे। नवाब खानदान की बहू और पूर्व सांसद बेगम नूरबानो ने बताया कि कोठी खासबाग में सामान से तोशाखाना (घरेलू सामान रखने का कमरा) भर जाता था। नुमाइश में चटकारे लेने के लिए मुरादाबादी दाल, चाट पकौड़ी, हलवा पराठा, कबाब-पराठों के स्टॉल लगते थे। नुमाइश शाम से सुबह तक चलती थी, इस दौरान नुमाइश के मंच पर सांस्कृतिक कार्यक्रम होते थे। नुमाइश देखने के लिए लोग दूर-दराज से आते थे और खूब खरीदारी करते थे।
नुमाइश के नहीं लगने से कारोबार को लगा है झटका
रामपुर नुमाइश नहीं लगने से कारोबार को झटका लगा है। नुमाइश में रामपुर के जरी जरदोजी, कारचोब, रामपुरी चाकू, चीनी मिट्टी के बर्तन, पेचवर्क से बनीं साड़ियों और बेडशीट, मिर्च का हलवा, अदरक का हलवा, आम का अचार, ककरौंदे का अचार, करेले का अचार समेत तरह-तरह के मुरब्बों की दुकानें सजती थीं। इसमें स्थानीय कारोबारियों को अच्छा रोजगार मिलता था। मंच पर कार्यक्रम होने पर कलाकारों की जेब भी भर जाती थी। ऑल इंडिया मुशायरे में स्थानीय शायरों को अपना-अपना कलाम पेश करने का मौका मिलता था। लेकिन नुमाइश नहीं लगने रोजगार में कमी आई है।
2023 में आखिरी बार लगा रामपुर हाट
केंद्रीय अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने वर्ष 2023 में रामपुर नुमाइश का नाम बदलकर रामपुर हुनर हाट लगवाया था। जोकि, रामपुर नुमाइश के तर्ज पर लगी थी। मंच पर कुमार शानू, पुनीत इस्सर समेत तमाम फिल्मी सितारों ने अपनी प्रस्तुति दी थी। इसके बाद से नुमाइश मैदान सूना पड़ा है और दुकानें खंडहर होती जा रही हैं। रामपुर नुमाइश लगने से कुछ दिनों के लिए लोगों के रोजगार का इंतजाम हो सकता है।
