ग्रामीण इलाकों में सरकारी ऑनलाइन सेवाएं देने के लिए संचालित किए गए कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) मकसद पर कामयाब नहीं हैं। शासन स्तर पर पंचायती राज विभाग द्वारा 57,694 ग्राम पंचायतों पर संचालित केंद्रों की समीक्षा की गई तो वर्ष 2025-26 में पोर्टल पर 22,030 सीएससी सक्रिय मिले, जबकि 35,664 सीएससी निष्क्रिय पाए गए। निदेशक पंचायती राज विभाग अमित कुमार ने नाराजगी जताते हुए सभी जिलों में सीएससी सक्रिय करने के निर्देश दिए हैं।
हर ग्राम पंचायत के पंचायत भवन में जनसेवा केंद्र की तरह एक सीएससी संचालित है। इनमें आय, जाति, निवास के आवेदन और उनकी प्रति निकालना, प्रधानमंत्री सम्मान निधि, वृद्धा, निराश्रित, दिव्यांग पेंशन आदि के आवेदन करना, खसरा-खतौनी की नकल निकालना जैसी 217 सेवाएं सर्विस प्रोवाइडर द्वारा दी जाती हैं। पंचायत भवनों में सीएससी संचालित करने का मकसद ग्रामीण ऑनलाइन कामकाज के लिए तहसील, मुख्यालय और सरकारी दफ्तरों के चक्कर न लगाएं। केंद्रों का संचालन करने के लिए मानदेय पर पंचायत सहायक तैनात किए गए हैं। पिछले सप्ताह वीडियो कांफ्रेंसिंग से हुई समीक्षा में कुछ जिलों ने रिपोर्ट में अंतर होने पर सवाल उठाए थे।
नवीनीकरण व वैलट रिचार्ज में आता खर्च
ऑनलाइन सेवा देने के लिए न्यूनतम 500 रुपये का वैलट रिचार्ज किया जाता है। जबकि नवीनीकरण में ए श्रेणी के जिले में 1000, बी श्रेणी में 750 और सी श्रेणी में 500 रुपये खर्च आता है। जिन पंचायत भवनों में जगह नहीं थी वहां चार-पांच लाख रुपये खर्च करके अतिरिक्त कक्ष बनाकर सं चालन किया गया है।
इन जिलों की ये प्रगति
बरेली 1188 में 704, शामली में 230 ग्राम पंचायत पर सीएचसी में 77 निष्क्रिय, हमीरपुर 330 में 137, लखनऊ 491 में 280, हरदोई 1293 में 542, रायबरेली 980 में 498, सीतापुर 1588 में 1095, जौनपुर 1734 में 1198, बाराबंकी 1155 में 806, बस्ती 1187 में 856, प्रतापगढ़ 1148 में 946, गोरखपुर 1273 में 605, बिजनौर 1123 में 580, शाहजहांपुर 1068 में 475 व बदायूं की 1037 ग्राम पंचायत में 470 सीएससी निष्क्रिय पाए गए।
