(www.arya-tv.com)दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के हत्थे चढ़े प्रतिबंधित संगठन ‘खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स’ के दोनों संदिग्ध आतंकी इंद्रजीत सिंह गिल और जसपाल सिंह की आईएसआई की मदद से पाकिस्तान में आतंकी प्रशिक्षण लेने की तैयारी थी। खालिस्तानी झंडा फहराने के आरोप में दबोचे गए इन संदिग्धों को दिल्ली से नेपाल पहुंचना था, जहां से इन्हें आईएसआई हैंडलर की मदद से पाकिस्तान जाना था। वहां इन्हें आतंकी प्रशिक्षण दिया जाता। इसके बाद पंजाब के कुछ और नौजवानों को संगठन से जोड़कर उन्हें भी ट्रेनिंग के लिए पाकिस्तान भेजे जाने की योजना थी। यह खुलासा दोनों संदिग्धों से पूछताछ में हुआ है।
संदिग्धों ने खुलासा किया कि ये घंटों खालिस्तान समर्थित चैनल देखते थे। ये व्हाट्सऐप के माध्यम से ‘सिख फॉर जस्टिस’ के सदस्य बने थे। मोगा की घटना के बाद ये लगातार विदेश में रहने वाले खालिस्तानी समर्थकों के संपर्क में थे। विदेशी आकाओं के जरिये इनकी योजना दिल्ली से नेपाल जाने की थी। वहां इन्हें आईएसआई हैंडलर मिलता, जो अपने नेटवर्क के जरिए इन्हें पाकिस्तान लेकर जाता।
मामा के भाई ने भड़काया
मामले की जांच से जुड़े स्पेशल सेल के मुताबिक, 10वीं तक की पढ़ाई करने वाला आरोपी इंद्रजीत सिंह जालंधर के एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में काम कर चुका है। गत कुछ वर्षों से वह खालिस्तान समर्थक आंदोलन से जुड़ गया था। यह जानकारी होने पर उसके मामा के भाई जग्गा ने उसे प्रतिबंधित यूट्यूब चैनल सिख फॉर जस्टिस देखने के लिए प्रेरित किया। इतना ही नहीं, उसने व्हाट्सएप लिंक के माध्यम से खालिस्तान समर्थित सिख फॉर जस्टिस चैनल से जोड़ भी दिया। इंद्रजीत रोजाना सुबह 9 बजे से 11 बजे तक प्रतिबंधित यूट्यूब चैनल देखने लगा था। इस बीच गत नौ अगस्त को व्हाट्सएप लिंक के माध्यम से उसने खालिस्तान के लिए वोट भी डाला था।
राणा ने कहा था झंडा फहराने
पूछताछ में इंद्रजीत ने बताया कि भारत विरोधी यह यूट्यूब चैनल विदेश से राणा नाम का शख्स चलाता है। उसने ही सिख युवकों को खालिस्तान के समर्थन में खालिस्तानी झंडा फहराने का आह्वान किया था। राणा ने युवकों को 14, 15 और 16 अगस्त को लाल किले पर तिरंगे की जगह खालिस्तानी झंडा फहराने पर 1,25,000 डॉलर का इनाम देने की घोषणा की थी, जबकि मोगा में ऐसा करने पर 2500 डालर इनाम देने की घोषणा की थी।
झंडा फहराकर वीडियो बनाया
इंद्रजीत सिंह ने गांव के ही इंटरनेट कैफे चलाने वाले साथी जसपाल सिंह के साथ 14 अगस्त को पंजाब स्थित मोगा के डीसीपी कार्यालय पर खालिस्तानी झंडा फहराने का षड्यंत्र रचा। इसके लिए उसने गांव के ही आकाशदीप सिंह को भी साथ लिया। तीनों 13 अगस्त को नानकशाह गए और वहां से खालिस्तानी झंडा खरीदा। बाद में उस पर काले रंग के मार्कर से खालिस्तान लिख दिया। इसके बाद 14 अगस्त को इंद्रजीत सिंह और जसपाल सिंह ने डीसी कार्यालय की छत पर पहुंच तिरंगा को हटाकर उसकी जगह खालिस्तानी झंडा फहरा दिया। आकाशदीप सिंह कार्यालय के बाहर से घटना की वीडियोग्राफी कर रहा था। बाद में इस वीडियो को सिख फॉर जस्टिस चैनल और व्हाट्सएप ग्रुप पर डाल दिया। अपलोड होते ही वीडियो वायरल हो गया। घटना के बाद पंजाब पुलिस ने आतंकियों के सहयोगी आकाशदीप को गिरफ्तार कर लिया जबकि इंद्रजीत सिंह और जसपाल सिंह फरार हो गए थे।
विदेशी हैंडलर के निर्देश पर आए दिल्ली
इस घटना के बाद दोनों लगातार विदेशी खालिस्तानी हैंडलर के संपर्क में थे। उसने दोनों को वहां से दिल्ली जाने का निर्देश दिया था। इतना ही नहीं, विदेशी हैंडलर ने इनके पास 20 हजार रुपये भी भिजवाए थे। दोनों की प्रशिक्षण के लिए नेपाल के रास्ते पाकिस्तान जाना था। नेपाल में जाने के बाद इन्हें आईएसआई एजेंट से मिलना था। वहां एजेंट ही रहने-खाने का इंतजाम कराता। इसके बाद इन्हें वहां से या तो खुद पाकिस्तान ले जाता या फिर अपने नेटवर्क के जरिए भेज देता।
