सुप्रीम कोर्ट के आवारा पशुओं को सड़कों से हटाने के आदेश दिए हैं, लेकिन इस आदेश का पालन फिलहाल नगर निगम के लिए मुश्किल ही दिख रहा है, क्योंकि शहर में लगभग 1.40 लाख स्ट्रीट डॉग हैं, लेकिन नगर निगम के पास 350 डॉग की क्षमता का एक शेल्टर होम इंदिरानगर के जरहरा में है। 300 क्षमता का दूसरा डॉग शेल्टर होम अमौसी में निर्माणाधीन है। इन दोनों शेल्टर होम को भी मिलाकर क्षमता 650 ही होती है।
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को आदेश दिया है कि आवारा पशु और कुत्ते सड़क पर न दिखें, इनके लिए शेल्टर होम बनाया जाएं। इसके लिए व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। नगर निगम के सर्वे के अनुसार सभी आठ जोन में लगभग 1.40 स्ट्रीट डॉग हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन के लिए नगर निगम को सभी 110 वार्डों में एक-एक शेल्टर होम बनवाना पड़ेगा। शासन को गाइडलाइन तय करने के साथ नगर निगम को बजट भी उपलब्ध कराना पड़ेगा। तभी गंभीर होती जा रही स्ट्रीट डॉग की समस्या का समाधान हो सकेगा।
नगर निगम के पास संसाधनों की भी कमी है। इसके अलावा उसके सामने स्ट्रीट डॉग लवर भी एक चुनौती हैं। स्ट्रीट डाग पकड़ने की कार्रवाई का यह स्ट्रीट डॉग लवर विरोध करते हैं। कर्मचारियों के साथ मारपीट तक हो जाती है। इसके अलावा नियम में भी बदलाव करना पड़ेगा, क्योंकि अभी पशु क्रूरता अधिनियम के अनुसार हिंसक हो चुके स्ट्रीट डॉग को पकड़कर दोबारा उसी स्थान पर छोड़ना पड़ता है।
गली-मोहल्लों में स्ट्रीट डॉग आमजन के लिए समस्या बन गए हैं। कुत्तों के काटने की कई घटनाएं हो चुकी हैं। कुत्तों का झुंड अचानक दौड़ाकर काट लेता है, जिससे राहगीर चोटिल हो जाते हैं। कुछ घटनाओं में लोगों की मौत भी हो चुकी है। रिहाइशी कालोनियों से लेकर अपार्टमेंट और स्कूलों के आस-पास कुत्तों के झुंड से लोगों में दहशत का माहौल रहता है। बच्चे और बुजुर्ग अकेले घरों से निकलने से डरते हैं।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर शासन निर्णय लेगा। शासन के निर्णय का अनुपालन कराया जाएगा। स्ट्रीट डॉग को अस्थायी रूप से रखने के लिए शेल्टर होम बनाने और संसाधन के लिए बजट की आवश्यकता पड़ेगी।
