लखनऊ में दो गुटों के विवाद ने लिया राजनैतिक रंग:सपा प्रत्याशी ने लगाया समर्थक के घर हमले का आरोप

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(www.arya-tv.com) लखनऊ के मड़ियांव इलाके के अन्ना मार्केट के पास सोमवार शाम दो गुटों में हुई मारपीट ने मंगलवार को राजनैतिक रंग ले लिया। जब मंगलवार दोपहर बाद मारपीट का वीडियो वायरल हो गया।मंगलवार को एक विधानसभा प्रत्याशी ने बयान जारी कर इसे राजनैतिक हमला बताया। वहीं पुलिस के मुताबिक नशेबाजी को लेकर विवाद हुआ था। इसको लेकर तीन लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है।

बीजेपी समर्थकों को हाथ होने का बयान जारी

मंगलवार दोपहर को एक सीसीटीवी फुटेज का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। जिसमें कुछ लोग एक घर के बाहर तोड़फोड़ कर रहे दिख रहे हैं। जिसे प्रसपा के नगर सचिव जुबेर आलम के घर के पास का बताया जा रहा है।इसके कुछ देर बाद ही सपा प्रत्याशी की तरफ से इस हमले के पीछे बीजेपी समर्थकों को हाथ होने का बयान जारी हो गया। दूसरी तरफ केशव नगर चौकी प्रभारी सफातुल्लाह के मुताबिक जुबेर आलम के घर पर हमला नहीं हुआ है। यह हमला अन्ना मार्केट के पास रहने वाले नफीस के घर पर हुआ है।

नशेबाजी का है विवाद 

इसके पीछे नशेबाजी का विवाद है। सोमवार शाम को रेहान दोस्तों के साथ बैठकर गांजा पी रहा था। इसी दौरान उधर से गुजर रहे ज्ञानेंद्र निषाद को रेहान ने रोक लिया। उसके विरोध करने पर मारपीट की। इसके बाद ज्ञानेंद्र ने दोस्तों के साथ रेहान के घर पर हमला बोल दिया।इसके साथ ही पथराव किया। प्रभारी निरीक्षक मड़ियांव वीर सिंह के मुताबिक रेहान के पिता नफीस की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर ज्ञानेंद्र निषाद, सिद्धार्थ सिंह और लईक को गिरफ्तार कर लिया गया है।

 राजनीतिक रंग देने की कोशिश

प्रभारी निरीक्षक मड़ियांव वीर सिंह के मुताबिक इस संबंध में मंगलवार दोपहर को सोशल मीडिया पर सीसीटीवी फुटेज वायरल हुआ। उसके साथ एक मैसेज था। इसमें आरोप था कि प्रसपा के नगर सचिव जुबेर आलम के घर पर हमला किया गया। जबकि जुबेर आलम नौबस्ता में रहते हैं। उनका नफीस से कोई सरोकार नहीं है। इसे राजनीतिक रंग देने की कोशिश की गई है।

पुलिस इस मामले में जांच कर रही है। इसी बीच एक और वीडियो इस संबंध में वायरल हो गया। जिसमें उत्तर विधानसभा से सपा प्रत्याशी पूजा शुक्ला ने बयान दिया। पूजा शुक्ला ने कहा कि सूचना मिली की सपा कार्यकर्ता जुबेर पर हमला किया गया है। यह वही लोग है जो भाजपा से जुड़े है। यह आरोप निराधार है। यह सिर्फ राजनीतिक रंग देने की कोशिश है। इसमें जिन लोगों ने भ्रामक वीडियो और मैसेज वायरल किया है। उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।