राज्य की कमजोर आय और बजट के धीमे खर्च से कई विभागों की योजनाएं अटक गई हैं। वित्तीय सत्र समाप्त होने में 50 दिन शेष हैं, जबकि बजट आधा भी खर्च नहीं हुआ है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंत्रियों और मुख्य सचिव समेत शासन की पूरी टीम को अपने-अपने विभाग का केंद्र से बचे धनावंटन समेत उपलब्ध धन को शत-प्रतिशत खर्च करन के सख्त निर्देश दिए हैं। ऐसे में 11 फरवरी को सदन में फिर बड़ा बजट पेश करने पर विपक्ष ने सरकार को घेरने की जबरदस्त तैयारी की है।
आंकड़ों के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए पिछले साल 20 फरवरी को 808736 करोड़ का करोड़ के आम बजट के बाद मानसून सत्र और शीतकालीन सत्र में दो बार अनुपूरक बजट के जरिए कुल 8,65,079.46 करोड़ रुपये के बजट सदन से पास कराया। लेकिन इसमें से अबतक केवल 4,70,835.97 करोड़ रुपये (करीब 54.42 प्रतिशत) ही विभागों को जारी किए गए। जारी राशि में से भी लगभग 4,28,495.95 करोड़ रुपये यानी करीब 91 प्रतिशत ही खर्च हो पाए हैं। यानी सरकार का बड़ा हिस्सा अब भी खजाने में ही पड़ा है, जबकि कई विभागों में योजनाएं धन के अभाव में धीमी बताई जा रही हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब मौजूदा बजट ही पूरी तरह खर्च नहीं हो पा रहा, तो नए रिकॉर्ड आकार के बजट का क्या व्यावहारिक लाभ होगा।
सूत्रों के अनुसार, आगामी बजट का आकार पिछले साल से करीब पौने एक लाख करोड़ रुपये और बढ़ाने की तैयारी है। चुनावी साल के मद्देनजर इसमें कई लोकलुभावन घोषणाओं और नई योजनाओं की संभावना भी जताई जा रही है। इधर, बजट खर्च की धीमी गति को लेकर मुख्यमंत्री ने हाल में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में सख्त रुख अपनाया था। विभागों के कम खर्च पर नाराजगी जताई, तो अफसरों ने कई योजनाओं में दिल्ली से केंद्रीय अंश का धनावंटन न होने की बात कही। मुख्यमंत्री ने संबंधित मंत्रियों, मुख्य सचिव और विभाग के प्रमुखों को निर्देश दिए कि खुद दिल्ली जाकर पैरवी करें और 31 मार्च तक शत-प्रतिशत कार्य पूरा कराएं। अब 50 दिन शेष बचे हैं, ऐसे में स्वीकृत बजट का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करके जवाबदेही से बचना आसान नहीं है।
