भारत सरकार का ”धरती माता बचाओ” अभियान खेतों में रासायनिक उर्वरकों का अंधाधुंध व अत्यधिक प्रयोग किसानों में जागरूकता लाकर रोकेगा। इसी अभियान के तहत ”ग्राम स्तरीय धरती माता बचाओ निगरानी समिति” उर्वरकों की बिक्री, कालाबाजारी, तस्करी और ओवररेटिंग पर गांव-गांव नजर रखकर लगाम लगाएगी। अभियान की शुरुआत 100 ग्रामाें से होगी, जहां सबसे अधिक रासायनिक उर्वरकों का इस्तेमाल किसान करते हैं।
जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जनपद स्तरीय, तहसीलों पर एसडीए और ग्राम पंचायतों पर प्रधान की अध्यक्षता में निगरानी कमेटी गठित कर दी गई हैं। ग्राम निगरानी समिति फसल से पहले बैठकें करके किसानों को संतुलित एवं वैकल्पिक उर्वरकों जैसे जैव व जैविक के प्रयोग की जानकारी देगी। रासायनिक उर्वरक की मात्रा व मृदा स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव बताएगी और परीक्षण के आधार पर मिट्टी काे उपचारित करके फसल कराएगी। इससे मृदा स्वास्थ्य में अनुकूल परिवर्तन आएगा। इसके अलावा उर्वरकों के गैर-कृषि उपयोग या सीमा पार तस्करी के लिए डायवर्जन के मामले में जिला व तहसील स्तरीय अधिकारियों को सूचना देगी।
समिति एक तरह से निगरानी तंत्र की तरह उर्वरकों का अवैध डायवर्जन, मिलावटी, कालाबाजारी, ओवररेटिंग, भंडारण समेत हर गतिविधि पर नजर रखेगी। ऐसी स्थिति में जिलाधिकारी, एसडीएम और जिला कृषि अधिकारी स्तर से विक्रेता के पकड़ने जाने पर लाइसेंस निलंबन, निरस्त और एफआईआर तक कराई जाएगी। अन्य कोई भी लिप्त मिला तो उस पर भी एफआईआर कराई जाएगी।
जिलाधिकारी के निर्देश पर कमेटी गठित कर दी है, जो सभी ग्राम पंचायतों पर नजर रखेंगी। 100 ग्राम पंचायतों का चयन कर रहे, जहां सबसे अधिक रासायनिक उर्वरक का प्रयोग होता है।
