नई दिल्लीः गणतंत्र दिवस की परेड में आयुष मंत्रालय की झांकी इस साल ‘आयुष का तंत्र, स्वास्थ्य का मंत्र’ विषय के तहत भारत की प्राचीन स्वास्थ्य परंपराओं और आधुनिक सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था के समन्वय की झलक पेश करेगी। ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दृष्टिकोण के अनुरूप यह झांकी राष्ट्रीय आयुष मिशन (एनएएम) की भूमिका को रेखांकित करती है, जिसके माध्यम से पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को सुदृढ़ कर उन्हें राष्ट्रीय स्वास्थ्य ढांचे में समाहित किया जा रहा है।
आयुष मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि झांकी में पारंपरिक ज्ञान और प्रकृति के प्रतीकात्मक संगम को दर्शाया जाएगा, जिसमें आचार्य चरक, आचार्य पतंजलि और आचार्य अगस्त्य की त्रि-आकृति वाली प्रतिमा औषधीय पौधों से आच्छादित हरित टीले के आसपास बैठी दिखाई देंगी।
मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, यह झांकी भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को समकालीन सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था के साथ एकीकृत करने का प्रतीक है। राष्ट्र निर्माण और वैश्विक स्वास्थ्य में आयुष की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डालते हुए आयुष मंत्री प्रतापराव जाधव ने कहा कि यह झांकी साक्ष्य-आधारित, जन-केंद्रित और निवारक स्वास्थ्य सेवा के प्रति भारत की प्रतिबद्धता का प्रतीक है, जो आयुष को राष्ट्रीय स्वास्थ्य का एक महत्वपूर्ण स्तंभ स्थापित करती है। झांकी की पृष्ठभूमि के संबंध में आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने कहा कि गणतंत्र दिवस की झांकी यह दर्शाती है कि आयुष किस प्रकार दृष्टिकोण से क्रियान्वयन की ओर बढ़ा है, जहां पारंपरिक प्रणालियों को व्यवस्थित रूप से भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था में जोड़ा गया है।
