प्रदेश सरकार आंबेडकर नगर में महाराजा सुहेलदेव राजभर वंशीय अष्ट खम्भा स्तूप को पर्यटन के केंद्र के रूप में विकसित करने जा रही है। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि एक करोड़ रुपए की धनराशि से स्तूप का समेकित पर्यटन विकास किया जाएगा। पर्यटन मंत्री ने गुरुवार को बताया कि परियोजना के तहत स्तूप के आसपास सौंदर्यीकरण, आधुनिक प्रकाश व्यवस्था, स्वच्छ शौचालय, सूचना केंद्र, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
इसका उद्देश्य न केवल प्राचीन धरोहर की ऐतिहासिक गरिमा बनाए रखना है, बल्कि राजभर समाज की शौर्यगाथा और संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाना भी है। उन्होंने कहा कि महाराजा सुहेलदेव ने 11वीं सदी में सैय्यद सालार मसूद के आक्रमणों के दौरान क्षेत्र की रक्षा की थी। अष्ट खम्भा स्तूप उस वीर गाथा का प्रतीक है, जिसे अब पर्यटन के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दी जाएगी।
महाराजा सुहेलदेव “राजभर वंशीय अष्ट खम्भा स्तूप” का सौन्दर्यीकरण
जयवीर सिंह ने बताया कि आंबेडकर नगर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान देने की दिशा में उत्तर प्रदेश सरकार एक महत्वपूर्ण पहल कर रही है। जिले के लोरपुर क्षेत्र स्थित महाराजा सुहेलदेव राजभर वंशीय अष्ट खम्भा स्तूप का पर्यटन विकास किया जाएगा। इस प्रयास का उद्देश्य न केवल प्राचीन धरोहर की ऐतिहासिक गरिमा को बनाए रखना है, बल्कि इसे संस्कृति और पर्यटन के संगम के रूप में विकसित कर राजभर समाज की शौर्यगाथा को राष्ट्रीय पटल पर स्थापित करना भी है।
बयान के मुताबिक 11वीं सदी में श्रावस्ती के वीर शासक महाराजा सुहेलदेव राजभर ने उत्तर भारत पर हो रहे विदेशी आक्रमणों के दौर में लोगों की रक्षा की। सैय्यद सालार मसूद द्वारा किए गए आक्रमणों में धार्मिक-सांस्कृतिक धरोहरों, विशेषकर प्रतीक चिह्न अष्ट खम्भों को भारी क्षति पहुंची, जिसे राजभर समाज ने अपनी पहचान और आस्था पर आघात माना।
तत्पश्चात, महाराजा सुहेलदेव ने निर्णायक युद्ध में सालार मसूद को मार गिराया और क्षेत्र को पुनः सुरक्षित किया। कालांतर में अष्ट खम्भों का जीर्णोद्धार हुआ और वे फिर से सांस्कृतिक गौरव का केंद्र बने। अब उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग इस ऐतिहासिक स्थल को पर्यटन विकास के माध्यम से नई पहचान देने जा रहा है।
