युग दधीचि देहदान अभियान के तहत पीलीभीत मेडिकल कॉलेज को पांचवीं देह मिली। यह पहला महिला देह है। कानपुर की जेके कॉलोनी के रहने वाले सेंगर दंपती आशा तिवारी की देह लेकर पहुंचे और मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों के सुपुर्द की। इसके साथ सेंगर दंपती द्वारा दी गई पांचवीं देह भी मेडिकल जगत को समर्पित हो गई।
बता दें कि कानपुर के रहने वाले मनोज सेंगर और उनकी पत्नी माधवी सेंगर ने युग दधीचि देहदान अभियान की शुरुआत 2003 में की थी। चिकित्सा जगत को देह समर्पित करने के इस अनूठे अभियान ने लगभग पूरे प्रदेश को अपने कार्यक्षेत्र में ले लिया है। इसके अंतर्गत देहदान महायज्ञ में आज 317वीं आहुति के रूप में गांधी नगर कानपुर की दुर्गादेवी रोड की रहने वाली 72 वर्षीय आशा तिवारी की पार्थिव देह राजकीय मेडिकल कॉलेज पीलीभीत को समर्पित की गई।
बता दें कि पीलीभीत मेडिकल कॉलेज को यह पांचवीं देह युग दधीचि देहदान अभियान द्वारा कानपुर से लाकर समर्पित की गई है। मेडिकल कॉलेज प्राचार्या डॉ. संगीता अनेजा ने सेंगर दंपती का आभार व्यक्त किया। कहा कि कॉलेज को पहला महिला शरीर दान में मिला है, जोकि चिकित्सकीय दृष्टि से अति महत्वपूर्ण है। यहां उपस्थित छात्रों ने दिवंगत देहदानी को पुष्प चढ़ाते हुए श्रद्धांजलि समर्पित की।
बता दें कि कानपुर में देह समर्पण के वक्त आशा तिवारी के देवर अरुण प्रकाश तिवारी, बहन ऊषा अवस्थी, देवरानी साधना तिवारी समेत अन्य इष्टमित्र मौजूद रहे। बता दें कि सेंगर दंपति पीलीभीत मेडिकल कॉलेज को पहला देहदान 17 अक्टूबर 2024 को दीन दयालनगर कानपुर निवासी राम प्यारे शुक्ल, दूसरा देहदान पांच मार्च 2025 को गांधीग्राम जीटी रोड कानपुर निवासी प्रेम चंद पाठक, तीसरा देहदान एक अगस्त 2025 को फतेहपुर निवासी रामशंकर गुप्ता और चौथा देहदान 16 अगस्त 2025 को कानपुर देहात निवासी शंकरलाल का किया था।
18 साल बाद पूरा हुआ आशा का संकल्प
बता दें कि 18 साल पूर्व वर्ष 2008 में आशा देवी ने देहदान शपथपत्र भरा था। वह परिवार को सख्त ताकीद करती रहतीं थीं कि उनका देहदान अवश्य कराया जाए। नौ फरवरी की शाम संक्षिप्त बीमारी के चलते उनका निधन हो गया। इसके बाद परिजनों द्वारा अभियान प्रमुख मनोज सेंगर को सूचना देकर देहदान संकल्प पूरा कराने का आग्रह किया गया। सेंगर ने अपनी पत्नी एवं अभियान की महासचिव माधवी सेंगर से परामर्श कर देह को पीलीभीत मेडिकल कॉलेज को देने का निर्णय लिया।
