गोरखपुर (www.arya-tv.com) मनीष हत्याकांड की जांच को लेकर गठित कानपुर एसआइटी टीम माह भर तक गोरखपुर में रही। मंगलवार को मामला सीबीआई के पास जाने के बाद एसआइटी टीम गोरखपुर से कानपुर के लिए रवाना हो गई। एसआइटी ने अपनी जांच को लेकर गोरखपुर में 21 गवाह तैयार किया था। चिकित्सक सहित इस मामले से जुड़े सभी लोगों से पूछताछ की थी और एसआइटी ने अपनी रिपोर्ट में इंस्पेटर जगत नारायण समेत सभी पुलिस कर्मियों को दोषी पाया था।
ऐसे हुई थी मनीष की हत्या
बता दें कानपुर के कारोबारी मनीष गुप्ता बीते 27 सितंबर को अपने दो दोस्तों के साथ गोरखपुर घूमने के लिए आए थे। वह यहां रामगढ़ताल थाने के होटल कृष्णा पैलेस में ठहरे हुए थे। 27 सितंबर की रात में होटल के कमरे में जांच के जांच के पहुंची पुलिस ने मनीष व उनके दोस्तों की पिटाई की थी। इससे मनीष की मौत हो गई थी। घटना को लेकर मनीष की पत्नी मीनाक्षी ने रामगढ़ताल थाने के तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक जगत नारायण समेत छह पुलिस कर्मियों पर हत्या का आरोप लगाया था। सभी पुलिस कर्मियों को निलंबित करने के बाद उनके विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया गया। घटना की जांच को लेकर कानपुर एसआइटी की टीम गठित की गई थी। जांच के दौरान एसआइटी ने सभी संभावित बिंदुओं की जांच की।
एसआइटी ने हाेटल कर्मियों से लेकर निजी हास्पिटल के चिकित्सक, मेडिकल कालेज के चिकित्सक सहित करीब 40 लोगों से पूछताछ की थी। घटना को लेकर एसआइटी ने 21 गवाह तैयार किया था। इस दौरान हत्यारोपितों की गिरफ्तारी भी हुई। बीते 13 अक्टूबर एसआइटी प्रभारी डीसीपी आनंद प्रकाश तिवारी कानपुर चले गए। उसके बाद विवेचक बृजेश श्रीवास्तव भी कानपुर चले गए। एसआइटी के एक इंस्पेक्टर व एक दारोगा बीते दो अक्टूबर से लेकर दो नवंबर तक गोरखपुर जमे रहे, लेकिन मामला सीबीआई के पास जाने से वह भी कानपुर लौट गए।
एसआइटी की जांच के बाद भी अनुत्तरित रहे सवाल
घटना की रात कितने पुलिस वालों ने मनीष पर हमला किया था।
तौलिया पर खून किसने पूछा था।
किसने खून से सने तौलिये को बेड के नीचे छिपा दिया था।
घटना के बाद पुलिस कर्मियों का सहयोग करने अन्य लोगों की क्या भूमिका रही।
पुलिस कर्मियों ने जीडी में क्यों छिपाई मानसी हास्पिटल ले जाने की बात
मनीष के दोस्त हरबीर व प्रदीप से सीन रिक्रिएट क्यों नहीं करा सकी एसआइटी
यह है घटनाक्रम
27 सितंबर- पुलिस की पिटाई से मनीष गुप्ता की मौत
28 सितंबर- इंस्पेक्टर जगत नारायण सहित सभी आरोपित पुलिस कर्मी निलंबित
29 सितंबर- इंस्पेक्टर जगत नारायण सिंह सहित छह पुलिस कर्मियों पर हत्या का केस
29 सितंबर- गोरखपुर पुलिस ने मामले की छानबीन शुरू की
30 सितंबर- विवेचना क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर को सौंपी गई
1 अक्टूबर- केस कानपुर एसआइटी को ट्रांसफर व सीबीआई जांच की संस्तुति
2 अक्टूबर- एसआइटी कानपुर ने गोरखपुर पहुंचकर शुरू की जांच
3 अक्टूबर- होटल, हास्पिटल व मेडिकल कालेज पहुंचकर जुटाए साक्ष्य
4 अक्टूबर- मनीष के हत्या किये जाने के मिले प्रमाण
5 अक्टूबर- आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए चार टीमें गठित की गईं
6 अक्टूबर- एसपी क्राइम व सीओ कैंपियरगंज के नेतृत्व में दो टीमें बढ़ाई गईं
7 अक्टूबर- आरोपितों के स्वजन व रिश्तेदारों पर बढ़ा पुलिस का दबाव
8 अक्टूबर- छापेमारी के लिए गोरखपुर व कानपुर की आठ-आठ टीमें लगाई गईं
9 अक्टूबर- इंस्पेक्टर जेएन सिंह व दारोगा अक्षय मिश्रा के स्वजन को पुलिस ने उठाया
10 अक्टूबर- इंस्पेक्टर जेएन सिंह व दारोगा अक्षय मिश्रा को पुलिस ने किया गिरफ्तार
12 अक्टूबर- दारोगा राहुल दुबे व सिपाही प्रशांत को पुलिस ने किया गिरफ्तार
13 अक्टूबर- हेड कांस्टेबल कमलेश यादव को पुलिस ने किया गिरफ्तार
16 अक्टूबर- दारोगा विजय यादव को पुलिस ने किया गिरफ्तार
2 नवंबर- सीबीआई ने केस दर्ज कर मामला अपने हाथ में ले लिया।
