सभी सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध निमोनिया, दस्त का इलाज, लक्षण दिखने पर तुरंत कराएं इलाज

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बदलते मौसम में बरती जा रही लापरवाही बच्चों की सेहत पर भारी पड़ रही है। खानपान में गड़बड़ी व सफाई की अनदेखी के चलते डायरिया व निमोनिया से पीड़ित बच्चों की संख्या बढ़ रही है। परिवार कल्याण विभाग के महानिदेशक डॉ. डी. एच.अग्रवाल का कहना है कि सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर ओआरएस और जिंक की दवाएं निःशुल्क उपलब्ध हैं तथा बच्चों के लिए आवश्यक जांच एवं उपचार की व्यवस्था है। इसलिए इन दोनों बीमारियों के लक्षण आने पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर अपने बच्चों को दिखाएं।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के महाप्रबंधक डॉ. मिलिंद वर्धन ने बताया कि बदलते मौसम में छोटे बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होती है, जिससे दस्त और निमोनिया का खतरा बढ़ जाता है। यदि अभिभावक प्रारंभिक लक्षणों की पहचान कर तुरंत आशा, एएनएम या नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य इकाई से संपर्क करें तो बच्चे को गंभीर स्थिति में जाने से रोका जा सकता है। समय पर ओआरएस, जिंक और आवश्यक दवाओं से अधिकतर मामलों में बच्चे पूरी तरह स्वस्थ हो जाते हैं।

डफरिन अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ.सलमान खान के अनुसार, 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों में होने वाली मृत्यु का लगभग 15–20 प्रतिशत हिस्सा दस्त और निमोनिया से जुड़ा होता है। अच्छी बात यह है कि ओआरएस, जिंक और समय पर उपचार से दस्त के 90 प्रतिशत से अधिक मामलों का प्रभावी प्रबंधन संभव है, वहीं निमोनिया की शीघ्र पहचान से जटिलताओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।

उन्होंने बताया कि दस्त होने पर तुरंत ओआरएस घोल देना प्रारंभ करें तथा स्वास्थ्य कार्यकर्ता से संपर्क कर 14 दिन तक जिंक की गोली देना सुनिश्चित करें। बार-बार स्तनपान जारी रखें और बच्चे को पर्याप्त तरल पदार्थ दें। निमोनिया के लक्षण दिखते ही देरी न करें। घर पर इलाज करने या झोलाछाप डॉक्टर से दवा लेने से स्थिति बिगड़ सकती है। समय पर इलाज से अधिकतर बच्चों को अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता भी नहीं पड़ती।