ऊर्जा संकट बढ़ा : ईरान ने वाणिज्यिक जहाजों, दुबई हवाई अड्डे और तेल सुविधाओं को बनाया निशाना

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दुबई : ईरान ने वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट बढ़ने और अमेरिकी व इजराइली हवाई हमलों के बीच तेल-समृद्ध क्षेत्र पर दबाव बनाने के अपने अभियान को तेज करते हुए फारस की खाड़ी में वाणिज्यिक जहाजों पर हमला किया व दुबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को निशाना बनाया। ईरान के दो ड्रोन दुबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास गिरे।

दुबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा लंबी दूरी की उड़ान भरने वाली विमानन कंपनी अमीरात का मुख्यालय है और अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए दुनिया का सबसे व्यस्त हवाई अड्डा है। दुबई मीडिया कार्यालय के अनुसार, इस हमले में चार लोग घायल हुए हालांकि उड़ान परिचालन जारी रहा। ईरान के संयुक्त सैन्य कमान ने पश्चिम एशिया में बैंकों और वित्तीय संस्थानों को निशाना बनाने की कवायद शुरू करने की घोषणा की। इससे विशेष रूप से दुबई, सऊदी अरब और बहरीन द्वीप समूह खतरे में पड़ सकते हैं।

इससे पहले, होर्मुज जलडमरूमध्य में ओमान के तट पर थाइलैंड के एक मालवाहक जहाज पर एक मिसाइल गिरी, जिससे पोत में आग लग गई। थाइलैंड के समुद्री विभाग के अनुसार, ओमान की नौसेना द्वारा 20 लोगों को बचाए जाने के बाद अधिकारी मयूरी नारी जहाज पर तैनात चालक दल के तीन लापता सदस्यों की तलाश कर रहे हैं। कुवैत ने कहा कि देश के रक्षा तंत्र ने ईरान के आठ ड्रोन मार गिराए जबकि सऊदी अरब ने शैबाह तेल क्षेत्र की ओर जा रहे पांच ड्रोनों को निशाना बनाया।

ईरान ने इस संकरे जलडमरूमध्य में माल ढुलाई को लगभग पूरी तरह रोक दिया है। यहां से तेल परिवहन का कुल पांचवा हिस्सा गुजरता है। ईरान ने खाड़ी अरब देशों में तेल क्षेत्रों व रिफाइनरियों को भी निशाना बनाया है और इन हमलों का उद्देश्य वैश्विक अर्थव्यवस्था को इतना नुकसान पहुंचाना है, जिससे अमेरिका और इजराइल पर अपनी सैन्य कार्रवाई को बंद करने का दबाव पड़े। इससे पहले अमेरिका ने कहा था कि उसने बारूदी सुरंग बिछाने वाले ईरान के 16 जहाज नष्ट किए हैं वहीं ईरान ने क्षेत्र के तेल निर्यात को रोकने का प्रण करते हुए कहा कि वह अपने दुश्मनों को ”एक लीटर” भी तेल भेजने की अनुमति नहीं देगा।

युद्ध के होर्मुज जलडमरूमध्य पर पड़ने वाले असर को लेकर बढ़ती चिंता के बीच अमेरिकी सेना ने बारूदी सुरंग बिछाने वाले 16 ईरानी जहाजों को नष्ट करने का दावा करते हुए कुछ वीडियो भी जारी किए। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान द्वारा विस्फोटक लगाए जाने की कोई सूचना नहीं है।

इसी जलमार्ग के जरिए दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल की ढुलाई होती है। वहीं ईरान के अर्धसैनिक रिवोल्यूशनरी गार्ड ने कहा कि वह “अगले आदेश तक इस क्षेत्र से शत्रु पक्ष और उसके सहयोगियों को एक लीटर तेल का निर्यात भी नहीं होने देगा”। संघर्ष के 11वें दिन में प्रवेश करने के साथ ही दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ बयानबाजी तेज कर दी है। अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने भी अब तक के सबसे भीषण हमलों का संकल्प दोहराया है। इस संघर्ष का असर पश्चिम एशिया और उससे बाहर के क्षेत्रों में भी दिखाई देने लगा है। ईरान के नेताओं ने बातचीत की संभावनाओं से इनकार कर दिया और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को चेतावनी देते हुए इजराइल तथा खाड़ी के अरब देशों पर नए हमले शुरू कर दिए।

सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय ने बुधवार को कहा कि ‘प्रिंस सुल्तान एयर बेस’ समेत उसके कई ठिकानों की ओर दागी गई मिसाइलों को बीच रास्ते में ही रोक दिया गया। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बुधवार को कहा कि दक्षिणी लेबनान में इजराइल की ओर से किए गए कई हमलों में सात लोगों की मौत हो गई। स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि मृतकों में रेड क्रॉस का एक सदस्य भी शामिल है। अधिकारियों के अनुसार ईरान में कम से कम 1,230 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि लेबनान में 480 से अधिक और इजराइल में 12 लोगों की मौत हो चुकी है।