समाजवादी पार्टी (सपा) ने उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में डुप्लीकेट मतदाता पंजीकरण को लेकर गंभीर चिंता जताई है। पार्टी का कहना है कि यह स्थिति आगामी चुनावों को प्रभावित कर सकती है और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए खतरा बन सकती है।सपा प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल ने इस मुद्दे पर राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए त्वरित कार्रवाई की मांग की है। ज्ञापन में बताया गया है कि कई ऐसे लोग, जिन्होंने बिहार की मतदाता सूची में विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत अपना नाम दर्ज कराया और वहां मतदान भी किया, वे अब उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में चल रही एसआईआर प्रक्रिया के दौरान फिर से अपना नाम दर्ज करा रहे हैं।
पार्टी को आशंका है कि ऐसे मतदाता वर्ष 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में मतदान कर चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं। सपा का कहना है कि अलग-अलग राज्यों में एसआईआर की प्रक्रिया एक साथ और समन्वय के साथ नहीं चलने के कारण एक ही व्यक्ति एक से अधिक राज्यों की मतदाता सूचियों में शामिल हो पा रहा है।
सपा ने केंद्रीय निर्वाचन आयोग से मांग की है कि इस समस्या से निपटने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। पार्टी का सुझाव है कि यदि कोई व्यक्ति किसी राज्य में मतदाता के रूप में पंजीकृत होकर मतदान कर चुका है, तो उसका नाम कम से कम पांच वर्षों तक उसी राज्य की मतदाता सूची में बना रहे और इस अवधि में किसी अन्य राज्य में उसका नया पंजीकरण न हो सके। ज्ञापन सौंपने वालों में केके श्रीवास्तव, डॉ. हरिश्चन्द्र सिंह और राधेश्याम सिंह शामिल थे।
