विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से कहा है कि पावर कारपोरेशन के संविदा कर्मी काफी संकट में हैं। जिन संविदा कर्मियों ने ईद और नवरात्र के दौरान अवकाश के दिनों में भी प्रदेश की विद्युत सप्लाई को सुचारू रखा, अब उन्हें बाहर का रास्ता दिखाने की तैयारी कर ली गई है। समिति ने मुख्यमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप पर छंटनी को रोकने और आउटसोर्स निगम से जोड़कर बढ़ा मानदेय बढ़ाने की मांग की है।
समिति के संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने गुरुवार को मुख्यमंत्री को एक पत्र भेजा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री एक ओर आउटसोर्स निगम बनाकर संविदा कर्मियों को बढ़ा हुआ मानदेय देने की घोषणा कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पावर कॉरपोरेशन इसके विपरीत संविदा कर्मियों की छंटनी करने में जुटा है।
अब तक प्रदेश भर से हजारों संविदा कर्मियों को हटा दिया गया है। अकेले लखनऊ से ही हाल ही में 647 कमिर्यों को हटाया गया है। एक अप्रैल से 326 और संविदा कर्मियों को हटाने का नोटिस जारी कर दिया गया है।
संघर्ष समिति ने आरोप लगाया है कि पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन द्वारा स्वयं को आउटसोर्स निगम से अलग रखने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे संविदा कर्मियों को शासन द्वारा प्रदान की जा रही सुविधाओं और सुरक्षा से वंचित रखा जा सके।
रामनवमी के अवसर पर जहां मुख्यमंत्री दो दिन का सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है। इसके बाद बिजली कर्मियों के लिए पहले अवकाश का आदेश जारी किया गया। लेकिन बाद में अवकाश रद्द कर ड्यूटी करने के निर्देश दे दिए गए।
