- पिरामल स्वास्थ्य ने हैल्थ इनफाॅर्मेशन हैल्पलाइन पर कोविड- 19 से संबंधित 2.5 लाख से अधिक काॅल का जवाब दिया
(www.arya-tv.com)पिरामल फाउंडेशन की एक पहल पिरामल स्वास्थ्य मैनेजमेंट एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट ने विभिन्न राज्य सरकारों के साथ मिलकर 104 हैल्थ इनफाॅर्मेशन हैल्पलाइन पर कोविड- 19 से संबंधित 2.5 लाख से अधिक काॅल का जवाब दिया है। असम, झारखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ में राज्य सरकारों की साझेदारी में संचालित हैल्थ इनफाॅर्मेशन हैल्पलाइन पर 25 मार्च, 2020 से लॉकडाउन की अवधि के दौरान ये टेलीफोन काॅल अटैंड किए गए। 104-हेल्थहेल्पलाइन को एक दिन में औसतन 20,000 कॉल मिले। कोविड- 19 महामारी के दौरान, 104 हैल्थ इनफाॅर्मेशन हैल्पलाइन सप्ताह के सातों दिन 24/7 कॉल करने वालों को आवश्यक चिकित्सा सलाह देकर सरकारों और समुदायों के बीच एक चैनल के रूप में कार्य कर रही है। इसने कोविड- 19 मामलों के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए राज्य सरकारों के साथ मिलकर कई अनूठी और कस्टमाइज्ड पहल की हैं। असम, छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार की राज्य सरकारों ने कोविड- 19 से संबंधित सभी प्रश्नों और शिकायतों के लिए एक वन स्टाॅप साॅल्यूशन के रूप में 104 हेल्पलाइन की घोषणा की है। कॉल की बढ़ती संख्या से निपटने के लिए, फ्रंटलाइन स्टाफ टीम को राज्य की आवश्यकता के अनुसार काफी विस्तारित किया गया है।
वर्तमान में, विभिन्न केंद्रों में कोविड- 19 की रिपोर्टिंग से संबंधित कॉल में 1200 से अधिक कर्मचारी भाग ले रहे हैं, जिनमें पैरामेडिक्स, काउंसलर और डॉक्टर भी शामिल हैं। यह टीम स्वास्थ्य सलाह, परामर्श, सूचना साझा करने का काम कुशलतापूर्वक पूरा कर रही है। पिरामल फाउंडेशन के सीईओ परेश पारसनीस ने कहा, पिरामल स्वास्थ में हम कोविड -19 महामारी के खिलाफ केंद्र और राज्य सरकारों की लड़ाई में उन्हें सपोर्ट करने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे हैं, यहां तक कि देश के सबसे दूर के हिस्से में भी ऐसे प्रयास जारी हैं। डब्लूएचओ और स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के दिशानिर्देशों के अनुसार कोविड- 19 के बारे में अधिकृत जानकारी मुहैया कराने के लिए 104 स्वास्थ्य हैल्पलाइन एक सरल और प्रभावी उपकरण साबित हुई है, खासकर ऐसे लोगों के लिए जो तकनीक के जानकार नहीं हैं या ऐसे क्षेत्रों में रहते हैं जहां मीडिया की पहुंच चुनौतीपूर्ण है। इस पहल से जागरूकता पैदा करने में मदद मिली है, जिससे कोरोनोवायरस के कारण समाज में उपजे डर और चिंता के माहौल को कम करने में सहायता मिली है।
