स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर प्रदेशभर में आक्रोश, उपभोक्ताओं के कनेक्शन कटने पर मुआवजे की मांग

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प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर बिजली उपभोक्ताओं में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। प्रदेश के कई जिलों में नेगेटिव बैलेंस के चलते लाखों उपभोक्ताओं के बिजली कनेक्शन काट दिए गए। वहीं दूसरी ओर बड़ी संख्या में ऐसे मामले सामने आए, जिनमें उपभोक्ताओं ने भुगतान करने के बावजूद आरएमएस सिस्टम में रिचार्ज सिंक न होने के कारण समय पर बिजली कनेक्शन बहाल नहीं हो सके। इससे पूरे प्रदेश में उपभोक्ताओं के बीच आक्रोश की स्थिति बन गई।

उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने इस पूरे मामले को गंभीर बताते हुए विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार से मुलाकात कर लोक महत्व का प्रतिवेदन सौंपा। उन्होंने बताया कि 14 मार्च को हजारों उपभोक्ताओं ने भुगतान कर दिया था, फिर भी उनके कनेक्शन समय पर नहीं जोड़े गए।

परिषद ने मांग की है कि ऐसे सभी उपभोक्ताओं को स्टैंडर्ड ऑफ परफॉर्मेंस कानून 2019 के तहत मुआवजा दिया जाए। परिषद ने यह भी मांग उठाई कि स्मार्ट प्रीपेड मोड में जिन उपभोक्ताओं पर बकाया हो गया है, उन्हें पोस्टपेड उपभोक्ता मानते हुए विद्युत वितरण संहिता के तहत किस्तों में भुगतान की सुविधा दी जाए, ताकि गरीब उपभोक्ताओं को राहत मिल सके।

परिषद अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि बिना उपभोक्ताओं को सूचना दिए उनके पुराने मीटर हटाकर स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगा दिए गए और उन्हें प्रीपेड मोड में बदल दिया गया, जो विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि आज बरेली में होने वाली बिजली दरों की सुनवाई में परिषद इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाएगी और स्मार्ट प्रीपेड मीटर के साथ बिजली दरों में बढ़ोतरी के खिलाफ आर-पार की लड़ाई लड़ेगी।