गलत बिल बनाकर वसूली केवल प्रशासनिक त्रुटि नहीं बल्कि दंडनीय अपराध है:इलाहाबाद हाईकोर्ट

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विद्युत उपभोक्ताओं को गलत और फर्जी बिल भेजने के मामले को गंभीरता से लेते हुए इसे आपराधिक कृत्य की श्रेणी में माना है। दो जजों की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि यदि जानबूझकर गलत बिल बनाकर वसूली की जाती है, तो यह केवल प्रशासनिक त्रुटि नहीं बल्कि दंडनीय अपराध हो सकता है।
अदालत ने मामले में कई महत्वपूर्ण प्रश्न उठाते हुए राज्य सरकार और ऊर्जा विभाग से जवाब तलब किया है। कोर्ट ने पूछा है कि उपभोक्ताओं को गलत बिल जारी करना, रिकॉर्ड में हेरफेर करना और उसके आधार पर वसूली की कार्रवाई करना क्या भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत अपराध नहीं बनता।
खंडपीठ ने प्रमुख सचिव ऊर्जा को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है और स्पष्ट किया है कि उपभोक्ताओं के मौलिक अधिकारों की रक्षा राज्य की जिम्मेदारी है। अदालत ने यह भी जानना चाहा कि फर्जी या बढ़े-चढ़े बिलों के मामलों में दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई है।
कोर्ट ने संकेत दिया कि यदि उपभोक्ताओं को अवैध रूप से परेशान किया गया है या गलत वसूली की गई है, तो यह संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के तहत प्रदत्त अधिकारों का उल्लंघन हो सकता है। मामले की अगली सुनवाई नियत तिथि पर होगी।
यह निर्णय उपभोक्ता अधिकारों की सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।