आर्यकुल कॉलेज ऑफ एजुकेशन में राष्ट्रीय सेमिनार का हुआ आयोजन- विज्ञान और आध्यात्म के संतुलन पर चर्चा

Lucknow
  • आर्यकुल कॉलेज ऑफ एजुकेशन में राष्ट्रीय सेमिनार का हुआ आयोजन- विज्ञान और आध्यात्म के संतुलन पर चर्चा

लखनऊ। आर्यकुल कॉलेज ऑफ एजुकेशन , बिजनौर (लखनऊ) ने विद्या भारती उच्च शिक्षण संस्थान के सहयोग से “विज्ञान आधारित आध्यात्म और सामाजिक मूल्यों के पुनर्निर्माण” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार में विभिन्न महाविद्यालयों के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। सेमिनार का मुख्य उद्देश्य विज्ञान और आध्यात्म के मध्य संतुलन स्थापित करना तथा समाज में नैतिक एवं सामाजिक मूल्यों के पुनर्निर्माण की आवश्यकता को रेखांकित करना था।

कार्यक्रम का शुभारंभ उद्घाटन सत्र के साथ हुआ। प्रथम तकनीकी सत्र की अध्यक्षता डॉ. सशक्त सिंह, कोषाध्यक्ष (विद्या भारती उच्च शिक्षण संस्थान) एवं मैनेजिंग डायरेक्टर, आर्यकुल ग्रुप ऑफ कॉलेजेज ने की। इस सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में प्रोफेसर डॉ. विपुल सेन, सेवानिवृत्त वरिष्ठ वैज्ञानिक, भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (मुंबई) उपस्थित रहे। उन्होंने “विज्ञान और आध्यात्म का समग्र दृष्टिकोण” विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि विज्ञान और आध्यात्म एक-दूसरे के पूरक हैं तथा इनके संतुलित समन्वय से समाज में सकारात्मक परिवर्तन संभव है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि वर्तमान में हो रहे अनेक शोधों की आधारशिला हमारे प्राचीन ऋषि-मुनियों द्वारा पूर्व में ही रखी जा चुकी है और अब समय आ गया है कि हम अपनी संस्कृति एवं परंपराओं के संरक्षण के प्रति सजग हों।

द्वितीय वक्ता के रूप में अनुज श्रीवास्तव (बी.टेक., आईआईटी खड़गपुर), विश्लेषक, जेनपैक्ट कंसल्टिंग ने “समाज में नैतिक और सामाजिक मूल्यों के पुनर्निर्माण” विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि वे विभिन्न स्थानों पर ऊर्जा के स्तर का अध्ययन कर रहे हैं तथा क्वांटम थ्योरी के माध्यम से उसे वैज्ञानिक रूप से समझाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने वर्तमान समाज में नैतिक मूल्यों में आ रही कमी पर चिंता व्यक्त करते हुए युवाओं को नैतिक शिक्षा एवं सही मार्गदर्शन की आवश्यकता पर बल दिया। उनके अनुसार विज्ञान एवं आध्यात्मिक शिक्षा का समन्वय ही समाज में स्थिरता और समृद्धि सुनिश्चित कर सकता है।
आर्यकुल कॉलेज ऑफ एजुकेशन के डॉ. अजय शुक्ला ने इस सत्र में उपस्थित सभी गणमान्य व्यक्तियों का धन्यवाद ज्ञापित किया ।

द्वितीय तकनीकी सत्र की अध्यक्षता प्रो. (डॉ.) हितैषी सिंह, प्रोफेसर, आरसीए गर्ल्स पीजी कॉलेज, कानपुर ने की। इस सत्र में मुख्य वक्ता डॉ. वाई.पी. सिंह, विभागाध्यक्ष, आईटी विभाग, वीर बल साहनी संस्थान ने नैतिक शिक्षा पर व्याख्यान देते हुए भारतीय संस्कृति के संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने नैतिक मूल्यों को समझने तथा भारतीय संस्कृति को बनाए रखने के लिए प्रेरित किया।

सेमिनार के अंतिम चरण में पैनल चर्चा एवं प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें शिक्षकों एवं छात्रों ने वक्ताओं से सीधे संवाद किया। इस संवादात्मक सत्र ने सेमिनार को और अधिक ज्ञानवर्धक एवं प्रभावी बना दिया।

कार्यक्रम के समापन अवसर पर आर्यकुल कॉलेज ऑफ एजुकेशन के डॉ. अब्दुल रब खान ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सेमिनार न केवल ज्ञान-विचारों के आदान-प्रदान का सशक्त मंच रहा, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में एक प्रेरणादायक पहल भी सिद्ध हुआ।
इस अवसर पर कॉलेज के रजिस्ट्रार सुदेश कुमार तिवारी, डॉ. गौरव मिश्र, डॉ. रेखा सिंह, अंजली तिवारी, संगीता मौर्या, वत्सल श्रीवास्तव सहित अन्य गणमान्य शिक्षक एवं स्टाफ सदस्य उपस्थित रहे।