भाषाई विविधता ही राष्ट्रीय एकता का सुदृढ़ आधार

Lucknow
  • भाषाई विविधता ही राष्ट्रीय एकता का सुदृढ़ आधार

लखनऊ। नवयुग कन्या महाविद्यालय के हिंदी विभाग द्वारा 21 फरवरी 2026 को अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का विषय “भाषाई विविधता: राष्ट्रीय एकता का आधार” रहा, जिसमें विद्वानों ने भाषाओं के आपसी संबंध, लोकभाषाओं की भूमिका और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान पर विचार साझा किए। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं माल्यार्पण के साथ हुआ। इसके बाद ‘वंदे मातरम्’ के सामूहिक गान से पूरा परिसर राष्ट्रभाव से गूंज उठा। भारतीय परंपरा के अनुरूप अतिथियों का स्वागत एवं सम्मान किया गया। हिंदी विभाग की डॉ. अंकिता पाण्डेय ने स्वागत उद्बोधन में मातृभाषा के संरक्षण और संवर्धन की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि भाषा केवल संप्रेषण का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कृति और पहचान का आधार है।

विशिष्ट वक्ता डॉ. राम बहादुर मिश्र ने कहा कि विविधता में एकता भारत की आत्मा है और भाषाएं इस एकता को मजबूत करती हैं। उन्होंने लोक भाषाओं को पाठ्यक्रम में शामिल करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि आज युवा पीढ़ी हिंदी व्याकरण से दूर होती जा रही है। उन्होंने अवधी भाषा की वाचिक परंपरा, लोकोक्तियों और मुहावरों को भाषा का प्राणतत्व बताया और उनके सामाजिक महत्व की व्याख्या की।

मुख्य वक्ता साहित्यकार डॉ. उमाशंकर शुक्ल ‘शितिकंठ’ ने कहा कि मातृभाषा केवल अभिव्यक्ति का साधन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक अस्मिता की वाहक है। उन्होंने हिंदी साहित्य के इतिहास में क्षेत्रीय भाषाओं और बोलियों की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ये भाषाएं हिंदी के विकास में बाधा नहीं, बल्कि सहयोगी रही हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि अनेक भारतीय शब्द अंग्रेजी भाषा में समाहित होकर वैश्विक पहचान बना चुके हैं।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. मंजुला उपाध्याय ने अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में शिक्षा, संस्कार और व्यक्तित्व निर्माण में मातृभाषा की भूमिका को रेखांकित किया और छात्राओं से अपनी भाषाई जड़ों से जुड़े रहने का आह्वान किया। उन्होंने आयोजन के लिए सभी अतिथियों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राध्यापकगण, हिंदू कन्या महाविद्यालय सीतापुर की डॉ. स्नेहलता, शोधार्थी और बड़ी संख्या में छात्राएं उपस्थित रहीं, जिन्होंने भाषाई सौहार्द बनाए रखने का संकल्प लिया।