लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जन भवन में आधुनिक सुविधाओं से युक्त आदर्श माध्यमिक विद्यालय के नवीन भवन के उद्घाटन समारोह में शिक्षा के क्षेत्र में इस पहल को एक मॉडल बताया। उन्होंने कहा कि राज्यपाल द्वारा जनभवन में किया गया यह अभिनव प्रयास माध्यमिक और बेसिक शिक्षा दोनों के लिए एक आदर्श उदाहरण है। मुख्यमंत्री ने सुझाव दिया कि इस मॉडल को प्रदेश के विभिन्न जनपदों के अधिकारियों और लोगों को दिखाया जाए, ताकि खासतौर पर सीएम कम्पोजिट विद्यालयों के निर्माण में इसे अपनाकर आगे बढ़ाया जा सके।
उन्होंने बताया कि इस भवन के निर्माण पर कुल 5 करोड़ 17 लाख रुपये खर्च हुए हैं, जिसमें से 4 करोड़ 70 लाख रुपये राज्य सरकार द्वारा दिए गए हैं, जबकि शेष राशि सीएसआर और राज्यपाल के प्रयासों से जुटाई गई है। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा, “जो दिखेगा वही समाज में बिकेगा। हम जैसा प्रस्तुत करेंगे, समाज वैसा ही स्वीकार करेगा।”
उन्होंने कहा कि वर्तमान पीढ़ी, जिस पर देश का भविष्य निर्भर है, उसे बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिलना अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए सबसे पहले संस्थानों के पास सुसज्जित और उपयुक्त भवन होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि एक अच्छा भवन शिक्षा के अनुकूल माहौल तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस अवसर पर उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि पहली बार राजभवन की टीम ने जनभवन के रूप में गणतंत्र दिवस परेड में भाग लिया, जो एक नई पहल है।
मुख्यमंत्री ने विद्यालय में आयोजित होने वाले स्पोर्ट्स मीट और अन्य गतिविधियों की सराहना करते हुए कहा कि यहां के बच्चों में बहुआयामी प्रतिभा देखने को मिलती है। अपने संबोधन में उन्होंने भारत के महान वैज्ञानिकों और विद्वानों का उल्लेख करते हुए कहा कि आर्यभट्ट ने शून्य और खगोल विज्ञान की अद्भुत अवधारणाएं दीं, जबकि वराहमिहिर ने आकाश के रहस्यों को उद्घाटित किया।
इसी प्रकार सुश्रुत को आधुनिक सर्जरी का आधार माना जाता है, और चरक ने आयुर्वेद को वैज्ञानिक स्वरूप प्रदान किया। आधुनिक विज्ञान के क्षेत्र में जगदीश चन्द्र बोस ने यह सिद्ध किया कि वनस्पतियों में भी जीवन होता है, जबकि सी. वी. रमन ने प्रकाश के रहस्यों को उजागर किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन महान वैज्ञानिकों की विरासत से प्रेरणा लेकर हमें नई पीढ़ी को विज्ञान और शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करना होगा।
